राष्ट्रवाणी: UPI MDR Calculation: यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) और जीएसटी का पूरा कैलकुलेशन समझें। जीएसटी पूरे …और पढ़ें यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर और जीएसटी का पूरा गणित, जानें किसे कितना चुकाना होगा जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| आपने दुकान पर 10,000 रुपए का UPI पेमेंट किया।
लेकिन क्या दुकानदार को पूरी रकम मिलती है? क्या इस पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगता है और अगर लगता है, तो जीएसटी कितना देना पड़ता है? सबसे दिलचस्प बात जीएसटी 10,000 रुपए पर नहीं, बल्कि एमडीआर (₹10000 UPI payment) पर लगता है।
आखिर 10,000 के पेमेंट में पूरा हिसाब क्या बनता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा कैलकुलेशन (UPI MDR Calculation)। भूटा शाह एंड कंपनी एलएपी के पार्टनर (इनडायरेक्ट टैक्स) अमित सरकार ने जागरण बिजनेस से खास बातचीत में बताया कि UPI पेमेंट में लगने वाला MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, पेमेंट प्रोसेसिंग और सेटलमेंट की सेवा का शुल्क है।
यह शुल्क दुकानदार यानी मर्चेंट से लिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर ग्राहक ने ₹10,000 का UPI पेमेंट किया और MDR 0.4% है, तो पहले MDR निकलेगा। सबसे जरूरी बात यह है कि जीएसटी पूरी पेमेंट (जीएसटी on UPI MDR) की रकम पर नहीं लगता।
जीएसटी सिर्फ MDR पर लगता है। यानी कुल कटौती होगी- ₹40 MDR + ₹7.20 जीएसटी = ₹47.20 इस तरह ₹10,000 के पूरे ट्रांजैक्शन पर 18% जीएसटी नहीं लगता। MDR और उस पर जीएसटी मिलाकर प्रभावी लागत 0.472% बैठती है।
ग्राहक से यह MDR अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नया मर्चेंट चार्ज ग्राहकों से वसूला न जाए। पात्र P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले ₹2,000 तक के लेनदेन मुफ्त रहते हैं।
वहीं, निर्धारित नियमों के तहत ₹2,000 से ज्यादा के P2M लेनदेन पर MDR लग सकता है, लेकिन यह दुकानदार की ₹1 लाख वाली छूट और संबंधित श्रेणी के नियमों पर निर्भर करेगा।

