राष्ट्रवाणी: What Is Rib Modeling Surgery For Slim Waist: पतली कमर और कर्वी फिगर की चाह में महिलाएं कई तरह की कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा लेती हैं. अब इसी कड़ी में रिब मॉडलिंग सर्जरी भी चर्चा में है. इस प्रक्रिया में कमर को ज्यादा पतला दिखाने के लिए शरीर की निचली पसलियों की बनावट में बदलाव किया जाता है. यही वजह है कि यह सर्जरी सोशल मीडिया और कॉस्मेटिक सर्जरी की दुनिया में लगातार ध्यान खींच रही है. रिब मॉडलिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इसमें पसलियों को हटाया नहीं जाता, बल्कि उनकी स्थिति और संरचना में बदलाव किया जाता है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य रिब केज की बनावट को बदलकर कमर को ज्यादा संकरा दिखाना है. यानी यह सिर्फ शरीर से अतिरिक्त फैट हटाने या स्किन को टाइट करने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें पसलियों की संरचना पर काम किया जाता है. पसलियों को जानबूझकर कमजोर या फ्रैक्चर किया जाता है डॉ. अनिल राजानी के मुताबिक, रिब मॉडलिंग में निचली पसलियों को जानबूझकर फ्रैक्चर या कमजोर किया जाता है और फिर उन्हें अंदर की ओर री-पोजिशन किया जाता है. इसका मकसद कमर की चौड़ाई को कम दिखाना होता है. उनके मुताबिक, प्रकाशित अध्ययनों में इस प्रक्रिया से कमर के आकार में कमी देखी गई है. हालांकि, रिब मॉडलिंग और पुरानी रिब रिमूवल सर्जरी एक जैसी नहीं हैं. रिब रिमूवल में पसली के कुछ हिस्से को निकाल दिया जाता है, जबकि नई तकनीकों में पसलियों को नियंत्रित तरीके से कमजोर या फ्रैक्चर करके उनकी स्थिति बदली जाती है और उन्हें स्थिर किया जाता है. कुछ हालिया अध्ययनों में इसके परिणाम भी सामने आए हैं. 2026 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में चार अध्ययनों और 318 मरीजों को शामिल किया गया था. इसमें तीन महीने के बाद कमर में औसतन करीब 8.6 सेंटीमीटर की कमी देखी गई. हालांकि, इस क्षेत्र में उपलब्ध रिसर्च अभी सीमित है और लंबे समय तक इसके परिणामों को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है. महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है ट्रेंड?
अमेरिका में इस प्रक्रिया को लेकर मांग बढ़ने की बात भी सामने आई है. डॉ. जोसेफ हेडीड और डॉ. आंद्रे मार्शल के मुताबिक, पिछले कुछ समय में रिब मॉडलिंग को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है. कई महिलाएं स्थायी रूप से ऐसी कमर चाहती हैं, जो कॉर्सेट पहनने के बाद बनने वाले कर्व जैसी दिखाई दे. कई बार इसे लिपोसक्शन जैसी दूसरी कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं के साथ भी कराया जाता है. शुरुआत में कई मरीज रिब रिमूवल के बारे में जानकारी तलाशते हैं, लेकिन बाद में उन्हें रिब मॉडलिंग के बारे में पता चलता है. रिब मॉडलिंग के दौरान निचली पसलियों पर काम किया जाता है. डॉ. हेडीड के मुताबिक, इसके लिए कमर के निचले हिस्से में दो छोटे चीरे लगाए जा सकते हैं और निचली तीन पसलियों में आंशिक फ्रैक्चर किया जाता है. डॉ. मार्शल के अनुसार, यह प्रक्रिया जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है. अल्ट्रासाउंड की मदद से पसलियों और फेफड़ों की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद एक विशेष उपकरण से पसली की सतह पर नियंत्रित तरीके से काम किया जाता है और दबाव देकर फ्रैक्चर किया जाता है. इसमें पसलियों को हटाया नहीं जाता. प्रक्रिया के बाद कॉर्सेट पहनने की जरूरत पड़ सकती है. डॉ. मार्शल के मुताबिक, कुछ मामलों में इसे करीब तीन महीने तक पहनना होता है ताकि पसलियों को नई स्थिति में स्थिर होने का समय मिल सके. डॉ. हेडीड के अनुसार, कमर में 2 से 4 इंच तक का अंतर दिखाई दे सकता है और लिपोसक्शन के साथ यह बदलाव और ज्यादा हो सकता है. यहीं इस सर्जरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल उठता है. पसलियां फेफड़ों के काफी करीब होती हैं, इसलिए हड्डी की संरचना में जानबूझकर बदलाव करना पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं माना जा सकता. हड्डी के ठीक से न जुड़ने, दोनों तरफ असमानता और न्यूमोथोरैक्स यानी फेफड़े के आसपास हवा जमा होने से फेफड़े के सिकुड़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. 2026 के एक वैश्विक सर्वे में 2,351 रिकॉर्ड्स के आधार पर कुल कॉम्प्लिकेशन रेट 3.7 प्रतिशत बताया गया. इसमें न्यूमोथोरैक्स की दर 0.17 प्रतिशत थी. कुछ मामलों में हीलिंग से जुड़ी समस्या, जलने, त्वचा में बदलाव और ऑपरेशन के बाद पहने जाने वाले कॉर्सेट से दबाव जैसी जटिलताएं भी दर्ज की गईं. एक अन्य 2026 के मल्टीसेंटर अध्ययन में 3,805 मरीजों को शामिल किया गया था. इसमें एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक के बाद एक साल पर कमर में औसतन 11 सेंटीमीटर की कमी देखी गई. हालांकि, कुछ मरीजों में न्यूमोथोरैक्स, हेमोथोरैक्स और लंबे समय तक दर्द जैसी जटिलताएं भी सामने आईं. इसलिए कमर का आकार कम होना और सर्जरी का सुरक्षित होना दो अलग बातें हैं. शुरुआती अध्ययनों में परिणाम उत्साहजनक दिखते हैं, लेकिन ज्यादातर रिसर्च छोटे सैंपल और सीमित फॉलो-अप पर आधारित हैं. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

