राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर l रायपुर खेत में धान की फसल लहलहा रही है, लेकिन सरकारी रिकार्ड में उसका रकबा शून्य दर्ज है। कहीं किसान के खेत का नक्शा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहा तो कहीं अलग-अलग खसरे एक ही लोकेशन पर दिखाई दे रहे हैं।
हद तो यह है कि कुछ खेतों का डिजिटल नक्शा तालाब तो कुछ का सात समंदर पार अटलांटिक महासागर पहुंच गया है। फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल हो रहे पीवी एप और ऑनलाइन गिरदावरी के आंकड़ों की ये गड़बड़ियां अब किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। 15 नवंबर से धान खरीदी होनी है।
ऐसे में रिकॉर्ड की त्रुटियां दूर नहीं हुईं तो किसानों को अपनी ही उपज समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए भटकना पड़ सकता है। सरकारी तकनीक से खेतों की पहचान और फसल का सत्यापन करने की व्यवस्था तो बनाई गई, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश में फसल का भौतिक सत्यापन पीवी एप के माध्यम से कराया जा रहा है।
इसके लिए खेत की लोकेशन, आकार और खसरा नंबर दर्ज किए जा रहे हैं, लेकिन इन आंकड़ों में विसंगतियां सामने आ रही हैं। सवाल यह कि जब एप खेतों की पहचान नहीं कर पा रहा तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर तैयार आंकड़ों की जवाबदेही किसकी होगी। बता दें कि पटवारी 13 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं।
यदि पटवारी वेरीफिकेशन करते हैं और गड़बड़ी होती है तो उन्हें जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की जाती है। अभी पीवी एप में लोकेशन गलत दर्शा रहा है और खेत का रकबा कम हो रहा है। इसी कारण पटवारियों ने पीवी एप से सर्वे करने से इन्कार किया है।
भागवत कश्यव, अध्यक्ष, पटवारी संघ यहां एप से सर्वे के दौरान खेत का डिजिटल नक्शा अटलांटिक महासागर बता रहा था। इस बड़ी गड़बड़ी के उजागर होने के बाद पोर्टल से मैप का विकल्प ही हटा दिया गया। जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में आनलाइन गिरदावरी की त्रुटियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
महुली, खोहीर, बैजनपाठ, लूलह, रामगढ़, चोंगा, कचवारी और करौती से शिकायत है कि खेतों में धान की फसल खड़ी होने के बावजूद आनलाइन रिकार्ड में रकबा शून्य दिखाई दे रहा है। कई किसानों के रिकार्ड में धान की जगह दूसरी फसल दर्ज है। पुसौर विकासखंड के दर्रामुंडा में खसरा नंबर 6/3 और 7/5 की वास्तविक लोकेशन अलग-अलग होने के बावजूद एप में एक ही स्थान पर दिखा रहा।
इसी तरह खसरा नंबर 10/1/क, 10/1/ख और 11/2/ख भी एक ही लोकेशन पर दिख रहे। इतना ही नहीं जहां 10 और 11 नंबर के खसरे होने चाहिए, वहीं पर 112 और 113 नंबर के खसरे दिख रहे। कचना क्षेत्र में जब सर्वेयर खसरा नंबर 33/2 के खेत का भौतिक सत्यापन कर रहे थे तो एप में लोकेशन खेत के बजाय कचना तालाब के बीच दिखाई दे रही थी।
इसके अलावा मैपिंग में एक ही जगह पर कई अलग-अलग खसरे दर्ज होने की बात सामने आई। भुइयां पोर्टल पर जमीन की स्थिति और पीवी एप में प्रदर्शित नक्शे के बीच अंतर होने से पटवारी भी परेशान हैं।

