राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, रायपुर : राशन दुकानों पर चावल तो मिल रहा है, लेकिन शक्कर नहीं मिलने से हितग्राही परेशान हैं। किसी को महीनेभर का राशन मिल गया है तो किसी की शक्कर की आस अब भी अधूरी है। हैरानी यह है कि अक्टूबर खत्म हो चुका है, लेकिन रायपुर जिले में जरूरत की तुलना में शक्कर का भंडारण सिर्फ 14 प्रतिशत ही हो पाया है।
जिले की 719 उचित मूल्य की दुकानों के लिए हर महीने करीब 470 टन शक्कर की जरूरत होती है, लेकिन अक्टूबर में महज 60 टन ही पहुंची। नतीजा यह कि करीब 86 प्रतिशत राशन कार्डधारी सरकारी शक्कर से वंचित रह गए। शक्कर की यह किल्लत दुकानदारों की लापरवाही से नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावट से पैदा हुई है।
नागरिक आपूर्ति निगम के मुताबिक कारखाने से करीब 10 दिन पहले दो ट्रक में 60 टन शक्कर भेजी गई थी। इसे रायपुर और आरंग क्षेत्र की दुकानों में वितरित कराया गया। मांग के मुकाबले मात्रा इतनी कम थी कि अधिक से अधिक दुकानों तक थोड़ी-थोड़ी शक्कर पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी।
इसके बावजूद अधिकांश हितग्राहियों को उनका पूरा कोटा नहीं मिल पाया। समस्या रायपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी सहकारी शक्कर कारखानों से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाया है।
कई जिलों में 80 से 85 प्रतिशत तक कार्डधारियों को शक्कर नहीं मिल सकी है। इससे परिवारों को अब बाजार से अधिक कीमत पर खरीदारी करनी पड़ रही है। कारखाने से 60 टन शक्कर भेजी गई है।
इसे रायपुर और आरंग की उचित मूल्य दुकानों में भंडारण कराकर हितग्राहियों को वितरित किया गया है। त्रिनाथ रेड्डी, डीएम नागरिक आपूर्ति निगम, रायपुर

