राष्ट्रवाणी (छत्तीसगढ़ ब्यूरो): हैदराबाद । डेस्क: हैदराबाद के मल्काजगिरि पुलिस अधिकारियों ने शहर में चल रहे एक अवैध फर्टिलिटी और एग डोनेशन गिरोह का भंडाफोड़ किया है. जांच में सामने आया है कि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा सहित सात राज्यों से भर्ती की गई महिलाओं को जाति, धर्म, रंग-रूप, लंबाई, शिक्षा और भौगोलिक पृष्ठभूमि जैसी विशिष्ट मांगों के आधार पर प्राप्तकर्ताओं से मिलाया जा रहा था.बेगमपेट निरीक्षक पी साईडुलु के अनुसार, मुख्य आरोपी अमित शर्मा और उसके सहयोगी देश भर में फैले एजेंटों के नेटवर्क के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य साधनों से जरूरतमंद महिलाओं की जानकारी साझा करते थे. जब भी कोई जोड़ा विशिष्ट मांग के साथ एग डोनर की तलाश में संपर्क करता, तो ये एजेंट नेटवर्क में विवरण भेजकर उपयुक्त महिलाओं की पहचान करते थे. आरोपी महिलाओं के ठहरने के लिए हॉस्टल का संचालन करते थे, जिनका इस्तेमाल वास्तव में महिलाओं को आईवीएफ (IVF) केंद्रों में ले जाने से पहले रखने के लिए किया जाता था.जांच अधिकारियों ने बताया कि प्राप्तकर्ताओं की मांगों के आधार पर ही महिलाओं को 20,000 से 30,000 रुपये और कुछ मामलों में 50,000 रुपये तक देने का वादा किया जाता था. रंग-रूप और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि सबसे आम मांगें थीं, और मांगें जितनी विशिष्ट होती थीं, एजेंट उतनी ही अधिक राशि वसूलते थे. भर्ती के लिए पुरानी डोनेशन देने वाली महिलाओं के संदर्भों का भी इस्तेमाल किया जाता था. मल्काजगिरि डीसीपी श्रीधर ने कहा कि पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े आईवीएफ केंद्रों की भूमिका और डोनर की पहचान सत्यापित करने की उनकी जिम्मेदारी पर स्वास्थ्य अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है. आईवीएफ (IVF) का पूरा नाम इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) है. आम भाषा में इसे ही “टेस्ट ट्यूब बेबी” प्रक्रिया कहा जाता है. यह सहायक प्रजनन तकनीक (ART – Assisted Reproductive Technology) का सबसे प्रमुख और प्रभावी रूप है, जिसका उपयोग उन दंपत्तियों की मदद के लिए किया जाता है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ होते हैं.’इन विट्रो’ शब्द का लैटिन में अर्थ होता है “कांच के भीतर”. शुरुआत में जब इस तकनीक के जरिए शरीर के बाहर प्रयोगशाला (कांच की पेट्री डिश या टेस्ट ट्यूब) में भ्रूण तैयार किया गया था, तब से इसे ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ का नाम मिला. हालांकि, बच्चे का विकास किसी टेस्ट ट्यूब में नहीं, बल्कि भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने के बाद सामान्य गर्भावस्था की तरह ही महिला के पेट में होता है. 1) ओव्यूलेशन इंडक्शन (अंडे बनना): महिला को विशेष हार्मोनल दवाएं या इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उसकी अंडाशय में एक के बजाय कई परिपक्व अंडे (Eggs) बन सकें.2) एग रिट्रीवल (अंडे निकालना): जब अंडे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तो एक minor माइनर सर्जिकल प्रक्रिया (सोनोग्राफी की मदद से) द्वारा महिला के शरीर से अंडे बाहर निकाल लिए जाते हैं.3) फर्टिलाइजेशन (निषेचन): प्रयोगशाला में निकाले गए अंडों को पुरुष के शुक्राणुओं (Sperm) के साथ मिलाकर एक नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है ताकि निषेचन हो सके और भ्रूण (Embryo) बन सके.4) एम्ब्रियो ट्रांसफर (भ्रूण प्रत्यारोपण): निषेचन के 3 से 5 दिनों के बाद, सबसे स्वस्थ और अच्छे भ्रूण को एक पतली ट्यूब की मदद से महिला के गर्भाशय (Uterus) में रख दिया जाता है. सोमवार, 02 नवम्बर 2026 सोम, 02 नव. 2026 | 04:09 प्रधानमंत्री खबरें, वीडियो और शॉर्ट्स — एक ही जगह ब्रेकिंग न्यूज़ और बड़ी खबरें सबसे पहले आपके पास।
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