राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, रायपुर। दिवाली की सफाई के साथ राजधानी में कचरे का ढेर भी बढ़ने लगा है। घरों से निकलने वाला अतिरिक्त कचरा अब कलेक्शन सेंटरों और खुले डिपो पर दबाव बढ़ा रहा है।
शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 तक पहुंच गई है। यानी 200 नए सेंटर बढ़ गए, लेकिन इनसे कचरा उठाने की व्यवस्था उसी रफ्तार से नहीं चल पा रही। कई जगह कचरा दो से तीन दिन तक पड़ा रह रहा है।
नगर निगम के 10 जोन के 70 वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण का जिम्मा ठेका कंपनियों को दिया गया है, इसके बावजूद नियमित उठाव पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बूढ़ापारा कलेक्शन सेंटर में जगह कम पड़ने लगी है। यहां कचरा खाली करने पहुंच रहे वाहन पहले के मुकाबले दोगुने से ज्यादा चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसे में दिवाली पर शहर को साफ रखने का दावा और जमीनी व्यवस्था आमने-सामने है। शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 हो जाना सफाई व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का संकेत है। इन डिपो में कचरा जमा होता है और फिर वाहनों के जरिए उसे हटाया जाना चाहिए।
लेकिन कई स्थानों पर कचरा दो से तीन दिन तक नहीं उठने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बूढ़ापारा स्थित कचरा कलेक्शन सेंटर के भीतर और बाहर कचरे का ढेर लग रहा है। यहां वाहन चालकों के मुताबिक पहले एक दिन में दो चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब चार से पांच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कचरा अधिक होने के कारण वाहन खाली करते ही दोबारा डोर-टू-डोर कलेक्शन के लिए निकलना पड़ता है। सेंटर में जगह नहीं बचने से पुराने धरना स्थल पर भी कचरा डालना पड़ रहा है। इससे साफ है कि कचरा उठाने के साथ उसे जमा करने और आगे भेजने की व्यवस्था भी दबाव में है।
नगर निगम ने 10 जोन के 70 वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण का जिम्मा ठेका कंपनियों को सौंपा है। इसके बाद भी यदि कचरा दो-तीन दिन में उठ रहा है तो व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वाहनों के निर्धारित फेरे पूरे हो रहे हैं या नहीं, किस वार्ड में वाहन कितनी बार पहुंच रहे हैं और कलेक्शन सेंटर से कचरा समय पर हटाया जा रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी है।
सफाई व्यवस्था की समीक्षा के दौरान महापौर मीनल चौबे ने खराब स्थिति पर नाराजगी जताते हुए रामकी कंपनी के प्रतिनिधियों को फटकार लगाई है। उन्होंने घर-घर से शत-प्रतिशत कचरा उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि अब काम की भौतिक जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
”काम नहीं तो वेतन नहीं” की नीति लागू करने की बात भी कही गई है।

