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तेल अवीव/नयी दिल्ली/न्यूयॉर्क/वाशिंगटन/दुबई. अमेरिका के रक्षामंत्री पीट हेगसेथ ने रविवार को कहा कि ईरान-इजराइल युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप सीमित है. अमेरिका के रक्षा प्रमुख ने दोहराया कि ईरान में अमेरिका द्वारा दीर्घकालिक युद्ध छेड़ने की मंशा नहीं है. उन्होंने कहा कि शनिवार और रविवार की दरमियानी रात किये हमलों को ”इरादतन सीमित” रखा गया था.

हेगसेथ ने कहा, ”मैं बस इतना कहूंगा, जैसा कि राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है और स्पष्ट कर दिया है, यह निश्चित रूप से सीमित हस्तक्षेप का मामला है.” उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि इसका अभिप्राय यह नहीं है कि अमेरिका की प्रतिक्रिया देने की सीमित क्षमता है और यदि आवश्यक हुआ तो वह ऐसा करेगा. हेगसेथ ने कहा, ”दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना अपने लोगों की रक्षा के लिए तैयार है.” अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने मानचित्र भी उपलब्ध कराया जिस रास्ते से होकर बी2 बमवर्षक विमानों ने ईरान पर कार्रवाई की.

पेंटागन द्वारा उपलब्ध कराए गए बी-2 स्टेल्थ बमवर्षकों के उड़ान मार्ग के मानचित्र के मुताबिक ये भूमध्य सागर से होकर इजराइल, जॉर्डन और इराक के वायुक्षेत्र होते हुए ईरान के ठिकानों तक पहुंचे. यह अब स्पष्ट नहीं है कि इन तीनों देशों को इन लड़ाकू विमानों के गुजरने की जानकारी कब हुई. इजराइल ने कहा है कि अमेरिकी हमले उसकी सेना के साथ समन्वय में किए गए. अमेरिका ने कहा कि इन हमलों में इजराइली लड़ाकू विमान शामिल नहीं थे.

पेंटागन ने मानचित्र जारी कर संवाददाताओं को मिशन की जानकारी दी. अमेरिका ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई में ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों को ‘अत्यंत गंभीर नुकसान पहुंचा” है. अमेरिक और ईरान के अधिकारियों के मुताबिक दोनों देश के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है. ईरान के शीर्ष राजनयिक ने खुलासा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद के रास्ते खुले हैं. इसके घंटों के बाद अमेरिकी रक्षामंत्री हेगसेथ ने भी संवाददाता सम्मेलन में इसे दोहराया.

अमेरिकी हमलों के बाद इजराइल-ईरान संघर्ष ‘निर्णायक चरण’ में : विशेषज्ञ

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि रविवार तड़के ईरान के तीन प्रमुख प्रतिष्ठानों पर अमेरिका द्वारा बमबारी किये जाने के बाद इजराइल-ईरान संघर्ष एक ”निर्णायक चरण” में प्रवेश कर गया है. वहीं, उनमें से कुछ का यह भी मानना है कि वाशिंगटन की यह ”जिम्मेदारी” थी कि वह सैन्य टकराव में शामिल नहीं हो.

पूर्व राजनयिक और लेखक राजीव डोगरा ने अमेरिकी हमले की आलोचना की और कहा कि यह वक्त ही बताएगा कि हमलों के बाद क्या ”विकिरण हुआ है या उसे किसी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है.” भारत और ईरान के बीच पुराने सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका के शामिल होने से ईरान-इजराइल टकराव तेज होने के कारण द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है.

उन्होंने आगाह किया कि यदि तेहरान अमेरिकी हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य (फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जल मार्ग) को बंद करने का फैसला करता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा.

डोगरा ने कहा, ”ईरान स्वाभाविक रूप से अपने पास उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करेगा. होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना या उससे होकर गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना, ऐसे विकल्प हैं जिनका ईरान इस्तेमाल कर सकता है.” उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो स्वाभाविक रूप से खाड़ी देशों से जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल का आयात करने वाले सभी देश प्रभावित होंगे और अंतत? तेल की कीमतों में उछाल आएगा.

पूर्व राजनयिक ने कहा, ”अगर तनाव कम होने की गुंजाइश बची भी थी तो अमेरिकी हमलों ने यह सुनिश्चित कर दिया कि हालात जल्दी सामान्य नहीं होंगे. लगभग एकमात्र महाशक्ति होने के नाते, यह अमेरिका की जिम्मेदारी थी कि उसे इस टकराव में शामिल नहीं होना चाहिए था.” एक अन्य पूर्व राजनयिक और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ दिलीप सिन्हा ने कहा, ”युद्ध अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर गया है.” उन्होंने कहा, ”इजराइल ने हवाई हमलों में पहले ही ईरान पर बढ़त हासिल कर ली थी. अब अमेरिका भी इसमें शामिल हो रहा है और वह ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है.” सिन्हा ने कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता अब ”काफी कम हो गई है.”

ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर ट्रंप ‘स्पष्ट जवाब’ दें: डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता
अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमले करने के अपने फैसले के लिए जनता को ‘स्पष्ट जवाब’ देना चाहिए. सीनेटर चक शूमर ने जोर देकर कहा कि किसी भी राष्ट्रपति को एकतरफा तरीके से देश को ‘युद्ध जैसी परिणामकारी चीज’ में झोंकने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और सीनेट सदस्य चक शूमर ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान में तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों (फोर्दो, नतांज और इस्फहान) पर बमबारी करने के बाद व्यापक, लंबे और अधिक विनाशकारी युद्ध का खतरा नाटकीय रूप से बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करके अमेरिका खुद भी इजराइल-ईरान युद्ध में कूद गया है. उन्होंने कहा, ”हमें युद्ध शक्ति अधिनियम को लागू करना चाहिए.” उन्होंने दोनों पक्षों के सभी सीनेटर से इसके लिए वोट करने का आह्वान किया.

ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद विभिन्न देशों ने किया मामले के कूटनीतिक समाधान का आह्वान

ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद इजराइल-ईरान युद्ध के क्षेत्र में फैल जाने की आशंका के मद्देनजर रविवार को विभिन्न देशों ने कूटनीतिक समाधान तलाशने और संयम बरतने की अपील की. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में इजराइल का साथ देने के बारे में दो सप्ताह में फैसला करेंगे. लेकिन महज दो दिन में अमेरिका ने इजराइल के अभियान में शामिल होते हुए रविवार तड़के ईरान पर हमला कर दिया.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी हमलों से ईरान को कितना नुकसान पहुंचा है. ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर अमेरिका ने इजराइल का साथ दिया तो वह जोरदार पलटवार करेगा. अमेरिका के हमलों के बाद विभिन्न देशों और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि अमेरिकी बमबारी से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, जिसे कोई भी देश झेल नहीं सकता. उन्होंने बातचीत का आ”ान किया.

औन ने ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा, ”लेबनान, इसके नेता, पार्टियां और लोग आज पहले से कहीं ज़्यादा इस बात से अवगत हैं कि इस देश ने अपनी जमीन और क्षेत्र में छिड़े युद्धों की भारी कीमत चुकाई है.” लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैलने पर उनके देश को इससे दूर रहने की जरूरत है.

सलाम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”हमारे लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना सबसे महत्वपूर्ण है. लेबनान को किसी भी तरह के क्षेत्रीय टकराव में शामिल होने से बचाने की जरूरत है.” संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि वह ईरान के परमाणु केंद्रों पर अमेरिका के बम हमलों से बेहद चिंतित हैं.

गुतारेस ने ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा, ”इस बात का जोखिम है कि यह संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकता है जिसके नागरिकों, क्षेत्र और दुनिया के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं.” उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा,”मैं सदस्य देशों से तनाव कम करने की अपील करता हूं. इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है, कूटनीति से ही कोई हल निकल सकता है.” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संकट का कूटनीतिक रूप से समाधान करने के लिए ईरान से वार्ता की मेज पर लौटने का आ”ान किया. उन्होंने कहा कि अस्थिर क्षेत्र में स्थिरता लाना प्राथमिकता होनी चाहिए. पिछले सप्ताह ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ, फ्रांस और जर्मनी संग जिनेवा में ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान निकालने का प्रयास किया था, जो सफल नहीं हो सका. स्टार्मर ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है.

उन्होंने कहा, ”ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और अमेरिका ने उस खतरे को कम करने के लिए कार्रवाई की है.” न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने रविवार को “सभी पक्षों से वार्ता की मेज पर लौटने” का आ”ान किया. उन्होंने संवाददाताओं को यह नहीं बताया कि न्यूजीलैंड राष्ट्रपति ट्रंप की कार्रवाई का समर्थन करता है या नहीं.

पीटर्स ने कहा कि यह संकट, ”अब तक का सबसे गंभीर संकट है और इसे आगे बढ़ने से रोका जाए.” उन्होंने कहा, “कूटनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक स्थायी समाधान प्रदान करेगी.” यमन के हूती विद्रोहियों और हमास दोनों ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है. हूतियों ने “इजराइली और अमेरिकी आक्रामकता” के खिलाफ लड़ाई में ईरान का समर्थन करने का संकल्प जताया है. रविवार को एक बयान में, हूती विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो ने मुस्लिम देशों से “इजराइली-अमेरिकी अहंकार के खिलाफ एक मोर्चे के रूप में जिहाद एवं प्रतिरोध” में शामिल होने का आ”ान किया. हमास और हूती ईरान के समर्थक रहे हैं.

चीन की सरकारी मीडिया ने सवाल किया कि क्या अमेरिका ईरान में वही गलती दोहरा रहा है, जो उसने इराक में की थी. चीन के सरकारी प्रसारक की विदेशी भाषा शाखा ‘सीजीटीएन’ के ऑनलाइन लेख में कहा गया है कि अमेरिकी हमले एक खतरनाक मोड़ का परिचायक हैं.

लेख में 2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण का हवाला देते हुए कहा गया है, “इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप के अक्सर अनपेक्षित परिणाम होते हैं, जिसके तहत लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा और क्षेत्रीय अस्थिरता बनी रही.” लेख में कहा गया है कि सैन्य टकराव के बजाय वार्ता को प्राथमिकता देने वाला एक संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण पश्चिम एशिया में स्थिरता की सबसे अच्छी उम्मीदें पैदा कर सकता है.

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने रविवार को संवाददाताओं से कहा कि स्थिति को जल्द से जल्द शांत करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से भी रोका जाना चाहिए. इशिबा से जब पूछा गया कि क्या वह ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन करते हैं, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. वह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद प्रमुख मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि उसने रविवार को एक आपातकालीन बैठक की, जिसमें अमेरिकी हमलों के संभावित सुरक्षा एवं आर्थिक परिणामों पर चर्चा हुई. शुक्रवार को तेहरान में अपने दूतावास को बंद करने और कर्मचारियों को वापस लाने वाले ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर संघर्ष को कूटनीतिक रूप से समाप्त करने पर जोर दिया है.

एक सरकारी अधिकारी ने लिखित बयान में कहा, “हम स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि ईरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा रहा है. ” बयान में कहा गया है, “क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति अत्यधिक अस्थिर है. हम एक बार फिर तनाव कम करने, संवाद एवं कूटनीति का मार्ग अपनाने का आह्वान करते हैं.”

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