पेरिस. अमेरिका ने मंगलवार को घोषणा की कि वह संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से फिर से बाहर निकल जाएगा, क्योंकि उसका मानना है कि उसकी भागीदारी देश के राष्ट्रीय हित में नहीं है और यह एजेंसी इजराइल विरोधी बयानों को बढ़ावा देती है.

यह निर्णय अमेरिका के यूनेस्को में पुन: शामिल होने के दो साल बाद आया है, जो 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान यूनेस्को से अलग हो गया था. अमेरिका के विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि यह वापसी यूनेस्को के ‘विभाजनकारी सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों को बढ़ावा देने’ के कथित एजेंडे से जुड़ी है.

उन्होंने एक बयान में आगे कहा कि यूनेस्को का ‘फलस्तीन राज्य को सदस्य देश के रूप में स्वीकार करने’ का निर्णय अत्यधिक समस्याजनक और अमेरिकी नीति के विपरीत है, और इसने संगठन के भीतर इजराइल विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा दिया है.
यह निर्णय, जिसकी पहली रिपोर्ट न्यूयॉर्क पोस्ट ने दी थी, दिसंबर 2026 के अंत में प्रभावी होगा. यह तीसरी बार होगा, जब अमेरिका पेरिस स्थित यूनेस्को से बाहर निकल जाएगा. ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका दूसरी बार इस संगठन से अलग होगा. अमेरिका वर्ष 2023 में इसमें फिर से शामिल हुआ था.

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने कहा कि उन्हें अमेरिकी फैसले पर ‘गहरा’ अफसोस है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अपेक्षित था और एजेंसी ने इसके लिए तैयारी कर ली थी. उन्होंने इजराइल विरोधी पूर्वाग्रह के आरोपों का भी खंडन किया. अमेरिका के हटने से यूनेस्को पर असर पड़ने की संभावना है क्योंकि अमेरिका एजेंसी के बजट का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है. यूनेस्को ने हाल के वर्षों में अपने वित्तपोषण स्रोतों में विविधता लाई है और अमेरिकी योगदान में कमी आई है, जो एजेंसी के कुल बजट का केवल आठ प्रतिशत है.

अजोले ने वादा किया कि यूनेस्को ‘अपरिहार्य रूप से कम संसाधनों’ के बावजूद अपने मिशनों को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि एजेंसी इस समय किसी भी कर्मचारी की छंटनी पर विचार नहीं कर रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में इससे बाहर निकलने की घोषणा की थी. उनका यह निर्णय एक साल बाद 2018 में प्रभावी हुआ.

वर्ष 2011 में फलस्तीन को सदस्य राज्य के रूप में शामिल करने पर यूनेस्को के मतदान करने के बाद अमेरिका और इजराइल ने इसे वित्तीय सहायता देना बंद कर दिया था. इससे पहले, रीगन प्रशासन के दौरान अमेरिका यूनेस्को से बाहर हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन द्वारा संगठन में फिर से शामिल होने के लिए आवेदन किए जाने के पश्चात अमेरिका पांच साल की अनुपस्थिति के बाद इसमें 2023 में फिर से शामिल हुआ था.

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version