मुंबई. स्थानीय शेयर बाजार में दो दिन से जारी तेजी पर बृहस्पतिवार को विराम लगा और बीएसई सेंसेक्स 296 अंक लुढ़क गया. वहीं एनएसई निफ्टी में 87 अंक की गिरावट आई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत से आयातित वस्तुओं पर एक अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क और रूस से कच्चे तेल एवं सैन्य उपकरण खरीदने को लेकर ‘जुर्माना’ लगाने की घोषणा के बाद शेयर बाजार में गिरावट रही.
कारोबारियों ने कहा कि कमजोर शुरुआत के बावजूद बाजार में तेजी से सुधार हुआ. लेकिन कारोबारी सत्र के अंत में बिकवाली दबाव देखने को मिला. कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बड़ी गिरावट को थामने में मदद की. तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स दोपहर के कारोबार में थोड़ा सुधरा और अंत में 296.28 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,185.58 अंक पर बंद हुआ. शुरुआती कारोबार में यह 786.71 अंक तक लुढ़क गया था. बीएसई में सूचीबद्ध 2,418 शेयरों में गिरावट रही जबकि 1,598 शेयर बढ़त में रहे. वहीं 137 शेयर के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ. पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 86.70 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,768.35 अंक पर बंद हुआ.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ”ताजा शुल्क की घोषणा से बाजार में शरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई. हालांकि बाद में भारतीय बाजार में सुधार हुआ. लेकिन अंत में, वायदा एवं विकल्प खंड में मासिक सौदे की समाप्ति के दिन यह कुछ गिरावट के साथ बंद हुआ.” उन्होंने कहा, ”निवेशकों का रुझान घरेलू स्तर पर केंद्रित, विशेष रूप से दैनिक उपयोग का सामाने बनाने वाली उन कंपनियों पर रहा, जिन्होंने आकर्षक मूल्यांकन, मांग परिदृश्य और शुल्क जोखिमों से अपेक्षाकृत सुरक्षा प्रदान की.
दूसरी तरफ, भारतीय ऊर्जा आयात पर अमेरिकी चेतावनियों के कारण तेल और गैस शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा.” ट्रंप की शुल्क घोषणा को भारत पर अमेरिका की मांगें मनवाने के लिए दबाव बनाने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. अमेरिका ने हाल में जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ अनुकूल व्यापार समझौते किए हैं. जुर्माना लगाने का कारण भारत का रूस से तेल और सैन्य उपकरणों की बड़ी खरीद है. रूस से आयात के लिए अमेरिकी जुर्माना झेलने वाला भारत पहला देश है. सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाटा स्टील, सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी और एशियन पेंट्स सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं.
दूसरी तरफ, दैनिक उपभोग के सामान बनाने वाली प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लि. (एचयूएल) में 3.48 प्रतिशत की तेजी आई. इसका कारण कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में 5.97 प्रतिशत बढ़कर 2,768 करोड़ रुपये रहा है.
इसके अलावा, इटर्नल (पूर्व में जोमैटो), आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और पावरग्रिड के शेयर भी लाभ में रहे.
रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, ”वायदा एवं विकल्प खंड में मासिक सौदे की समाप्ति के दिन बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और मिले-जुले संकेतों के बीच यह मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ. अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत पर शुल्क लगाने की अचानक घोषणा से शुरुआत में गिरावट आई. हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में धीरे-धीरे सुधार से सूचकांक कुछ समय के लिए सकारात्मक रुख में रहा.” छोटी कंपनियों से जुड़े बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में 0.85 प्रतिशत और मझोली कंपनियों से संबंधित मिडकैप सूचकांक में 0.70 प्रतिशत की गिरावट रही.
एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट में रहे, जबकि जापान का निक्की बढ़त के साथ बंद हुआ. यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में मिला-जुला रुख रहा. अमेरिकी बाजार बुधवार को ज्यादातर गिरावट के साथ बंद हुए थे. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत टूटकर 72.70 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.
शेयर बाजार के के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 850.04 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
पिछले कारोबारी सत्र में, सेंसेक्स 143.91 अंक चढ़ा था जबकि निफ्टी 33.95 अंक के लाभ में रहा था.
