नयी दिल्ली. बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की नीतियों को लेकर नागरिक प्रशासन और व्यापार क्षेत्र में असंतोष के बीच देश में रातों-रात बेचैनी बढ़ गई. बड़े पैमाने पर प्रसारित होने वाले ‘प्रथम आलो’ समाचार पत्र ने एक रिपोर्ट छापी जिसका शीर्षक था, ”सचिवालय में विरोध प्रदर्शन, एनबीआर नि्क्रिरय, नगर भवन पर लगा ताला”, इस खबर में सरकारी कर्मचारियों की सेवा से जुड़े एक प्रस्तावित कानून के खिलाफ कर्मचारियों के जारी प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड के अधिकारियों और ढाका दक्षिण नगर निगम के कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र था.

इस बीच, व्यापारिक समुदाय के एक प्रमुख नेता शौकत अजीज रसेल ने कहा कि देश में व्यापारियों को उसी तरह मारा जा रहा है जैसे 1971 के मुक्ति संग्राम में बुद्धिजीवियों को मारा गया था. उन्होंने चेतावनी दी कि अधिक से अधिक लोगों के बेरोजगार होने से स्थिति बदत्तर हो सकती है. बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन (बीटीएमए) के अध्यक्ष रसेल ने व्यापार मंडलों के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”हमें नहीं पता कि बकरीद से पहले हम श्रमिकों को बोनस और वेतन कैसे देंगे.” उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों में, बांग्लादेश निवेश विकास प्राधिकरण एक भी निवेशक लाने में विफल रहा है.

रसेल ने कहा, ”आप विदेशियों को देश में निवेश करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं…(लेकिन) विदेशी जानते हैं कि बांग्लादेश में निवेश करना व्यवहार्य नहीं है. वे जानते हैं कि वियतनाम (में निवेश) बांग्लादेश से ज्यादा लाभदायक है.” इस बीच, सरकारी कर्मचारियों ने लगातार दूसरे दिन रविवार को बांग्लादेश सचिवालय के अंदर विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन प्रस्तावित सरकारी सेवा (संशोधन) अध्यादेश, 2025 के खिलाफ किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारी इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने इसे एक ”काला कानून” करार दिया है, जिससे अधिकारियों के लिए दंडात्मक कार्रवाई करना और सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करना आसान हो गया है. मुख्य सलाहकार यूनुस की अंतरिम कैबिनेट ने पिछले सप्ताह इस कानून को मंजूरी दी थी, और अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है.

राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) के अधिकारियों ने भी एक अलग अध्यादेश को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार को लगातार दूसरे दिन काम का बहिष्कार किया और उन्होंने सोमवार से लगभग सभी आयात-निर्यात गतिविधियों को अनिश्चितकाल के लिए रोकने की धमकी भी दी. इस बीच, सरकारी प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों ने कहा कि वे वेतन वृद्धि समेत अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जाएंगे.

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