आजकल आप जिधर देखें—सुपरमार्केट के शेल्फ हो या इंस्टाग्राम की रील—हर जगह ‘मिलेट्स’ (Millets) का बोलबाला है। रागी कुकीज़, ज्वार के पफ्स और बाजरे की खिचड़ी अब ‘गरीबों का खाना’ नहीं, बल्कि अमीरों का ‘सुपरफूड’ बन गया है। सरकार ने भी इसे ‘श्री अन्न’ का नाम दिया है।

लेकिन रुकिए! क्या मिलेट्स वाकई कोई नई खोज हैं? या यह वही “मोटा अनाज” है जिसे हमारी दादी-नानी बरसों से हमारी थाली में परोस रही थीं और हम नाक-भौं सिकोड़ते थे?

आइये जानते हैं कि आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस इस ‘नए-पुराने’ सुपरफूड के बारे में क्या कहते हैं।

1. मिलेट्स आखिर हैं क्या? (What are Millets?)

आसान भाषा में, मिलेट्स यानी मोटा अनाज। ये वो अनाज हैं जिन्हें उगाने के लिए कम पानी और कम खाद की जरूरत होती है। ये सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।

कुछ प्रमुख मिलेट्स जो हम भारतीय जानते हैं:

  • Jowar (Sorghum): ज्वार
  • Bajra (Pearl Millet): बाजरा
  • Ragi (Finger Millet): रागी/नाचनी
  • Kodo, Kutki, Barnyard: कोदो, कुटकी, सावां (व्रत वाले चावल)

2. आयुर्वेद का नज़रिया: हर किसी के लिए नहीं है मिलेट्स!

यहाँ मॉडर्न डाइट और आयुर्वेद में थोड़ा मतभेद है। जहां डायटीशियन कहते हैं “ओट्स हटाओ, मिलेट्स खाओ”, वहीं आयुर्वेद कहता है— “सावधानी से खाओ।”

आयुर्वेद में मिलेट्स को ‘कुधान्य’ (Kudhanya) या ‘तृण धान्य’ कहा गया है। इनके गुण (Properties) इस प्रकार हैं:

  • रुक्ष (Dry): ये स्वभाव से सूखे होते हैं।
  • लेखन (Scraping): ये शरीर से फैट को खुरच कर निकालते हैं (Weight Loss के लिए बेहतरीन)।
  • लघु (Light): पचने में हल्के होते हैं।

किसे खाना चाहिए? (Dosha Connection)

  • कफ (Kapha) प्रकृति: जिनका वजन ज्यादा है या सुस्ती रहती है, उनके लिए मिलेट्स अमृत हैं।
  • वात (Vata) प्रकृति: जिन्हें गैस, ब्लोटिंग (Bloating) या जोड़ों में दर्द रहता है, उन्हें मिलेट्स का सेवन कम करना चाहिए या बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसका ‘रूखापन’ वात को बढ़ा सकता है।

3. मॉडर्न साइंस क्यों है इनका दीवाना?

विज्ञान की नज़र में मिलेट्स एक Powerhouse हैं:

  1. Gluten-Free: जिन्हें गेहूं (Wheat) से एलर्जी है या पेट फूलता है, उनके लिए यह बेस्ट विकल्प है।
  2. Low Glycemic Index (GI): ये शुगर लेवल को एकदम से नहीं बढ़ाते, इसलिए डायबिटीज वालों के लिए यह गेहूं और चावल से बेहतर हैं।
  3. High Fiber: ये पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं, जिससे भूख कम लगती है।

4. मिलेट्स खाने का सही तरीका (The Right Way)

यही वह जगह है जहाँ हम गलती करते हैं। हम मिलेट्स को गेहूं की तरह खाना शुरू कर देते हैं, जिससे पेट दर्द या गैस हो सकती है। दादी-नानी के नुस्खे यहाँ काम आते हैं:

  • Rule #1: भिगोना जरूरी है (Soaking) मिलेट्स में ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid) होता है जो न्यूट्रिएंट्स को सोखने से रोकता है। बनाने से कम से कम 6-8 घंटे पहले इन्हें भिगोना जरूरी है।
  • Rule #2: घी का तड़का (Add Healthy Fat) क्योंकि मिलेट्स रूखे (Dry) होते हैं, आयुर्वेद कहता है कि इन्हें हमेशा घी या तेल के साथ पकाना चाहिए। बाजरे की रोटी पर ढेर सारा घी सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उसे पचाने के लिए लगाया जाता था।
  • Rule #3: मौसम का ध्यान (Seasonality)
    • बाजरा: गर्म तासीर (Heating) -> सर्दी में खाएं।
    • ज्वार/रागी: ठंडी तासीर (Cooling) -> गर्मी में खाएं।

मिलेट्स कोई ‘फैड’ (Fad) नहीं हैं, यह हमारी जड़ों की वापसी है। मॉडर्न साइंस ने बस उस पर मुहर लगाई है जो हमारी दादी-नानी पहले से जानती थीं।

तो अगली बार जब आप कैफे में ‘Ragi Pancake’ आर्डर करें, तो गर्व महसूस करें। बस याद रखें—मिलेट्स को फैशन की तरह नहीं, अपनी बॉडी टाइप (Body Type) और मौसम के हिसाब से खाएं।

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