नयी दिल्ली/कोलकाता. राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश करने वाले कई विपक्षी सांसद, अचानक इस्तीफे के बाद उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. दिलचस्प है कि उच्च सदन के ऐसे कई सांसदों की धनखड़ ने उनके आचरण को लेकर खिंचाई की थी. ऐसे सांसदों ने उनसे अपने इस्तीफे पर पुर्निवचार करने का भी अनुरोध किया. उनका मानना था कि एक”किसानपुत्र” को सम्मानजनक विदाई नहीं दी जा रही है.
राज्यसभा का सभापति रहते हुए धनखड़ का कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से अक्सर टकराव होता था. खरगे ने आरोप लगाया था कि सभापति उन्हें सदन में सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं. कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश भी धनखड़ की आलोचना करते हुए कहा था कि उपराष्ट्रपति को ‘अंपायर’ की तरह तटस्थ रहना चाहिए.
रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा था, ”सभापति राज्यसभा की कार्यवाही जिस पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित कर रहे हैं, उसे देखते हुए ‘इंडिया’ गठबंधन से जुड़े सभी दलों के पास उनके खिलाफ औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.” हालांकि, धनखड़ के इस्तीफे के बाद रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धनखड़ को अपना विचार बदलने के लिए कहना चाहिए और यह राष्ट्रहित में होगा.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”जगदीप धनखड़ के जबरन इस्तीफे के संबंध में प्रधानमंत्री के पोस्ट ने रहस्य को और बढ.ा दिया है. निश्चित रूप से प्रधानमंत्री कुछ अधिक उदार हो सकते थे, आख.रिकार, वह दोहरे मापदंड के महारथी हैं.” उन्होंने दावा किया कि एक किसान पुत्र को सम्मानजनक विदाई से भी वंचित किया जा रहा है. एक अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल भी धनखड़ की आलोचना का शिकार हुए थे. उनके इस्तीफे के बाद, सिब्बल ने कहा कि धनखड़ एक “राष्ट्रवादी और देशभक्त” हैं.
सिब्बल ने कहा, “मुझे अच्छा नहीं लग रहा है और मेरे उनके साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. कोई बुरी भावना नहीं थी… वह बातों को अपने दिल में नहीं रखते हैं.” पिछले साल दिसंबर में न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने के लिए दिए गए नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के लिए सिब्बल ने धनखड़ के खिलाफ सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी.
धनखड़ ने सदन के अंदर आसन के निर्देशों की अवहेलना करने और ‘आपत्तिजनक’ भाषा का इस्तेमाल करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन पर निशाना साधा था. धनखड़ ने आम आदमी पार्टी के सांसदों राघव चड्ढा और संजय सिंह को भी फटकार लगाई थी. सपा सांसद जया बच्चन के साथ भी उनकी बहस हुयी थी. कांग्रेस नेता और जाने-माने वकील अभिषेक सिंघवी को भी धनखड़ के तीखे शब्दों का सामना करना पड़ा जब उच्च सदन में उनकी सीट से 500 रुपये के नोटों की एक गड्डी मिली थी.
ममता ने धनखड़ के इस्तीफे पर कहा: उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि वह उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा देने पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं. हालांकि, बनर्जी ने साथ ही यह भी कहा कि उनका मानना है कि धनखड़ का स्वास्थ्य “बिल्कुल ठीक” है.
बनर्जी ने राज्य सचिवालय नबान्न में संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक अस्पष्ट टिप्पणी में संकेत दिया कि इस घटनाक्रम में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज़्यादा कुछ हो सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा, ”राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकते कि धनखड़ ने इस्तीफ.ा क्यों दिया. इस मुद्दे पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है.” उन्होंने कहा, ”देखते हैं. वह एक स्वस्थ व्यक्ति हैं. मुझे लगता है कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है.” बनर्जी की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल धनखड़ के कदम पर मचे राजनीतिक घमासान के बीच आयी है. विपक्ष के कई लोगों ने दावा किया है कि यह कदम “पूरी तरह अप्रत्याशित” है और संभवत? “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने” के आधिकारिक रुख से परे कारकों से प्रेरित है.
