क्रिकेट जगत में पिछले 24 घंटों में अगर सबसे बड़ा कोई भूचाल आया है, तो वह है टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा बदलने वाले कोच ब्रेंडन मैकुलम की अचानक और बेइज्जत करके की गई बर्खास्तगी। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने जिस आक्रामक अंदाज़ में मैकुलम को उनके पद से हटाया है, उसने साफ कर दिया है कि पेशेवर खेल में वफादारी और पुरानी उपलब्धियों की कोई औकात नहीं होती। जो ‘बैज़बॉल’ कल तक इंग्लैंड क्रिकेट का सबसे बड़ा गौरव था, आज उसे एक फ्लॉप और नाकाम दर्शन घोषित कर इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया गया है।

मैकुलम ने खुद मीडिया के सामने आकर यह कबूला कि वह इस फैसले से बेहद आहत और टूटे हुए हैं, लेकिन बोर्ड के आक्रामक रुख के आगे उनके पास गिड़गिड़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। इंग्लैंड का यह कदम उन सभी कोचों के लिए एक खुली चेतावनी है जो खुद को खेल से बड़ा समझने की भूल कर बैठते हैं। नतीजे नहीं दोगे, तो कितनी भी बड़ी ब्रांडिंग हो, लात मारकर बाहर निकाल दिया जाएगा। मैकुलम का जाना सिर्फ एक कोच का जाना नहीं है, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के उस सबसे मनोरंजक और आक्रामक दौर का अंत है जिसने दुनिया भर के फैंस को रोमांचित किया था। अब देखना यह है कि इंग्लैंड का यह अहंकार उन्हें आगे ले जाता है या वे वापस उसी पुराने, बोरिंग ढर्रे पर लौट आते हैं।



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