कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंगलवार को उस समय अव्यवस्था की स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बांग्ला भाषी प्रवासियों पर कथित हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. भाजपा विधायकों ने शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु की उस टिप्पणी के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया, जिसमें विधायकों ने दावा किया था कि इस टिप्पणी से सेना की छवि खराब हुई है.

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के वरिष्ठ विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया, जब बसु ने सोमवार को कोलकाता में सेना द्वारा तृणमूल कांग्रेस के मंच को ध्वस्त करने और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में 1952 के बांग्ला भाषा आंदोलन के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के बीच तुलना की. संसदीय कार्य मंत्री सोभनदेव चट्टोपाध्याय ने नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए हाल ही में दिल्ली में एक प्रवासी मजदूर के परिवार के बच्चे को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की घटना को राज्य के बाहर “बंगालियों द्वारा झेले जा रहे उत्पीड़न” का उदाहरण बताया.

चर्चा जारी रहने के दौरान बसु ने आरोप लगाया कि सेना ने मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास तृणमूल के मंच को ध्वस्त कर दिया है और कहा कि इस घटना ने उन्हें 1952 के आंदोलन के दौरान अपनी मातृभाषा और पहचान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों के बलिदान की याद दिला दी.

बसु ने कहा, “भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों पर हमलों के विरोध में तैयार किये गए हमारे मंच को जब सेना ने गिरा दिया, तो हमारी मुख्यमंत्री स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं. इसने मुझे उन लोगों पर हुई गोलीबारी की याद दिला दी, जिन्होंने हमारी भाषा और पहचान की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी.” इस टिप्पणी पर भाजपा के सदस्यों ने तत्काल हंगामा शुरू कर दिया.
अधिकारी ने सरकार पर “सेना को बदनाम करने” और “मैदान पर अतिक्रमण के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई” को ऐतिहासिक बलिदान के बराबर बताने का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में क्रूरता बरती थी.

अधिकारी ने कहा, “यह सरकार सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए एक गौरवशाली राष्ट्रीय संस्था को बदनाम कर रही है.” इससे पहले, अध्यक्ष द्वारा बसु की टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने से इनकार करने के बाद उन्होंने सदन से बहिर्गमन किया. विधानसभा में यह मुद्दा 24 घंटे से भी कम समय में उठाया गया, जब सेना के अधिकारियों ने मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के निकट तृणमूल कांग्रेस के मंच को इस आधार पर हटा दिया था कि पार्टी ने अनुमति की अवधि से अधिक समय तक वहां मंच बना रखा था. मेयो रोड रक्षा बलों के स्वामित्व और प्रशासन वाला क्षेत्र है.

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