राष्ट्रवाणी: Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर के छोटे देवड़ा में विकास कार्यों के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए. विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि बड़ी पंचायत होने के कारण यहां विकास की जरूरतें भी ज्यादा हैं और काम प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान स्वीकृत कई विकास कार्यों को वर्तमान में दोबारा भूमिपूजन और लोकार्पण के जरिए उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है. विधायक ने कहा कि विकास कार्य किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं. जनता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि किसी कार्य को स्वीकृति कब मिली और निर्माण की वास्तविक शुरुआत कब हुई. उन्होंने हालिया राजनीतिक दौरे का जिक्र करते हुए विकास कार्यों की स्वीकृति और आदेश को लेकर पारदर्शिता की जरूरत बताई. इसी दौरान समदु के घर से राहुल सोनवानी के घर तक बनने वाली सीसी सड़क का भूमिपूजन किया गया. कार्यक्रम में विधायक और सरपंच संतोष कश्यप मौजूद रहे. वहीं पंचायत के 21 युवाओं ने कांग्रेस की विचारधारा पर भरोसा जताते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. विधायक ने कहा कि जनता के सामने विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट रखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है. छोटे देवड़ा में विकास के मुद्दे के साथ सामने आई यह सियासत आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है. सुकमा. नक्सल प्रभावित पहचान से आगे बढ़कर सुकमा अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. तोंगपाल इलाके का बेंगपाल झरना इसका उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां प्रशासन ने पर्यटन की संभावनाएं तलाशनी शुरू की हैं. कलेक्टर अमित कुमार, एसपी मयंक गुर्जर, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर और डीएफओ अक्षय भोसले ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया. बारिश के बीच अधिकारियों की टीम करीब 30 मिनट तक दुर्गम और फिसलन भरे रास्ते से होते हुए झरने के निचले हिस्से तक पहुंची. तटाहकवाडा से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित इस झरने तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं है. संकरी पगडंडी, पथरीली पहाड़ियां और बारिश में बढ़ती फिसलन पर्यटकों के लिए चुनौती बन सकती है. अधिकारियों ने प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखते हुए यहां पर्यटन सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा की. सुरक्षित पहुंच मार्ग, जरूरी बुनियादी सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना पर विचार किया जा रहा है. पर्यटन विकसित होने से आसपास के ग्रामीणों के लिए गाइड, होम स्टे और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के अवसर बन सकते हैं. यानी जंगल और पहाड़ अब सिर्फ दुर्गमता की पहचान नहीं, बल्कि रोजगार और पर्यटन की संभावनाओं का आधार भी बन सकते हैं. प्रशासन जिले के ऐसे अन्य प्राकृतिक स्थलों को चिन्हित कर पर्यटन की बेहतर योजना तैयार करने की बात कह रहा है. जगदलपुर. बस्तर में खेती के लिए बाजार में उपलब्ध नैनो यूरिया किसानों को फिलहाल अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पा रहा है. निजी दुकानों में नैनो यूरिया मौजूद है, लेकिन किसान अब भी पारंपरिक दानेदार यूरिया को ही प्राथमिकता दे रहे हैं. दुकानदार आधा लीटर नैनो यूरिया को 50 किलो दानेदार यूरिया के बराबर प्रभावी होने का दावा कर रहे हैं. इसके बावजूद किसान प्रयोग करने के बजाय दानेदार यूरिया खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं. पिछले खरीफ सीजन में यूरिया की कमी के दौरान कुछ किसानों ने नैनो यूरिया का इस्तेमाल किया था. लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने की शिकायतों के चलते इस बार इसके प्रति किसानों का उत्साह कम दिखाई दे रहा है. वहीं इस सीजन में समितियों के साथ निजी दुकानों में भी दानेदार यूरिया की उपलब्धता बेहतर बताई जा रही है. ऐसे में किसानों के सामने नैनो यूरिया अपनाने की मजबूरी भी नहीं है. कंपनी का दावा है कि नैनो यूरिया फसल को पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है. हालांकि किसानों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए नतीजों और उपयोग को लेकर भरोसा कायम करना बड़ी चुनौती है. अब देखना होगा कि आने वाले सीजन में नैनो यूरिया बस्तर के खेतों में जगह बना पाता है या दानेदार यूरिया पर किसानों का भरोसा कायम रहता है. जगदलपुर. बस्तर की कला और ग्रामीण उत्पादों ने मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय एक्सपो में अपनी अलग पहचान बनाई. 10 से 13 सितंबर तक आयोजित भारत उदय मध्य प्रदेश एक्सपो में बस्तर की महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए. बिहान मिशन से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक शिल्प के साथ जैविक और स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया. बेलमेटल यानी ढोकरा कला से तैयार कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं. वहीं तीखुर, इमली, हल्दी, धनिया, लाल मिर्च, जीराफूल चावल और सरसों तेल जैसे उत्पादों की भी बिक्री हुई. इस आयोजन का सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को सीधे ग्राहकों और व्यापारियों से जुड़ने का मिला. बिना बिचौलियों के बिक्री ने महिला समूहों को अपने उत्पाद की वास्तविक बाजार क्षमता समझने का मौका दिया. इसके साथ ही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बड़े शहरों के बाजार की मांग को समझने का व्यावहारिक अनुभव भी मिला. ढोकरा शिल्प और स्थानीय खाद्य उत्पादों की मांग ने महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ाया है. अब चुनौती इन उत्पादों को सिर्फ मेलों और प्रदर्शनियों तक सीमित रखने के बजाय स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की है. अगर यही मॉडल आगे बढ़ता है तो बस्तर का ग्रामीण हुनर महिलाओं के लिए नियमित आय और बड़े कारोबार का आधार बन सकता है. सुकमा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा सुकमा में महीनेभर कार्यक्रम आयोजित करेगी. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं.नभाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेंकट ने जिला मुख्यालय स्थित अटल सदन में अभियान की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन को सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम की भावना से जोड़कर लोगों तक पहुंचाया जाएगा. 17 सितंबर को जन्मदिन के अवसर पर बूथ स्तर तक ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है. मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों, लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं के घरों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे. युवा मोर्चा की ओर से रक्तदान शिविर के साथ विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम भी होंगे. ‘मेरे सपनों का भारत’, ‘सुशासन संवाद’ और ‘सेवा शक्ति इनोवेशन चैलेंज’ जैसे कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे. सुकमा जिला मुख्यालय में 25 हजार दीये जलाकर विशेष आयोजन की तैयारी की जा रही है. स्कूलों में चित्रकला प्रतियोगिताओं के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान का भी कार्यक्रम रखा गया है. भाजपा का यह अभियान मोदी के 25 वर्ष के राजनीतिक सफर को सेवा गतिविधियों के जरिए जनता तक पहुंचाने पर केंद्रित रहेगा. जगदलपुर. ग्राम पंचायत आड़ावाल के आश्रित ग्राम नारायणपाल में हर महीने 100 रुपये की कथित वसूली को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों और महिलाओं का आरोप है कि प्रत्येक राशन कार्डधारी से संपत्ति कर वसूली के नाम पर राशि ली जा रही है. लेकिन ग्रामीणों को अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वसूली किस नियम के तहत हो रही है. राशि किस खाते में जमा की जा रही है और इसका इस्तेमाल कहां किया जा रहा है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की संख्या अधिक है. ऐसे परिवारों के लिए हर महीने 100 रुपये की अतिरिक्त राशि देना भी बोझ बन सकता है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि यह संपत्ति के आधार पर लिया जाने वाला कर है तो सभी राशन कार्डधारियों से समान राशि क्यों ली जा रही है. बैठक में पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं का मुद्दा भी सामने आया. ग्रामीणों के मुताबिक कई बार खराब मोटर और बिजली से जुड़े खर्च के लिए भी उन्हें खुद राशि जुटानी पड़ती है. नारायणपाल निवासी मनीराम बघेल और इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल ने वसूली की प्रक्रिया की जांच की मांग की. ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन वसूली का नियम, रसीद, बैंक खाता और राशि के उपयोग का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करें.

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