अमेरिका: दुनिया भर में अमेरिकी टैरिफ को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है। इसका बड़ा कारण है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक आयात शुल्क को 6-3 के बहुमत से रद्द कर बड़ा झटका दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर ये टैरिफ लगाए थे, जो कि गैरकानूनी हैं। इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 20 फरवरी को हीं एक नया एलान कर वैश्विक जगत में टैरिफ को लेकर हलचल और बढ़ा दी है। ट्रंप के एलान में कहा गया है कि 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता फिर बढ़ गई है।

इस फैसले के बाद भारतीय उत्पादों पर लगने वाला पारस्परिक टैरिफ अब घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत रह जाएगा। पहले अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। बाद में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इस तरह कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

भारतीय निर्यातकों के लिए राहत

जब भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत पहुंचा। इसके बाद हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हुआ था, जिसके तहत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी थी। इस दौरान 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा दिया गया था। ऐसे में कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए एलान के बाद अब अमेरिका में भारतीय सामान पर केवल 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लागू रहेगा।

अब समझिए यह 10 प्रतिशत कैसे लगेगा?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यह 10 प्रतिशत शुल्क मौजूदा आयात शुल्क (एमएफएन ड्यूटी) के ऊपर लगेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पहले से पांच प्रतिशत शुल्क है, तो अब उस पर दस प्रतिशत और जुड़ जाएगा। यानी कुल 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा। पहले यही शुल्क 5 + 25 प्रतिशत यानी 30 प्रतिशत तक था।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ, ये भी समझिए

ट्रंप के इस टैरिफ खेल पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। ऐसे में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि अब भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी क्योंकि टैरिफ घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। वहीं थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने सुझाव दिया है कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए।
हालांकि अजय श्रीवास्तव के अनुसार अब केवल 55 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर यह 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। करीब 40 प्रतिशत सामान पहले से ही छूट की श्रेणी में है। लेकिन स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत और कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का सेक्टोरल टैरिफ अभी भी जारी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का रुख

टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत के साथ व्यापार समझौता जारी रहेगा। बता दें कि इससे पहले, जब दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा घोषित किया था, तब ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने का वादा किया है।

अब समझिए भारत-अमेरिका व्यापार का हाल

गौरतलब है कि साल 2021 से 2025 के बीच अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। आयात में हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत है। कुल द्विपक्षीय व्यापार में हिस्सा 10.73 प्रतिशत है। इतना ही नहीं वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल है।



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