सीजी न्यूज ऑनलाइन, 07 जून 2026। बीसीसीआई ने आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम का ऐलान कर दिया है, जिसमें श्रेयस अय्यर को नया कप्तान बनाया गया है. हालांकि, पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को खराब फॉर्म के चलते न सिर्फ कप्तानी से हाथ धोना पड़ा, बल्कि उन्हें 15 सदस्यीय टीम से भी बाहर कर दिया गया है.

आखिरकार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम का ऐलान कर दिया. लेकिन इस टीम सेलेक्शन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले की हो रही है वह है सूर्यकुमार यादव का टीम से बाहर होना और श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपा जाना. जो अय्यर बीते लंबे समय से टी20 स्क्वॉड में नहीं थे, वे न केवल टीम में लौटे बल्कि सीधे कप्तान बने हैं. दूसरी तरफ, वो सूर्यकुमार यादव जो कुछ ही समय पहले तक भारत के टी20 कप्तान थे, उन्हें न केवल कप्तानी से हाथ धोना पड़ा, बल्कि वे 15 सदस्यों की टीम में भी अपनी जगह नहीं बना पाए.

क्रिकेट, जो अनिश्चितताओं का खेल है, उसमें बदलाव हमेशा होते रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं है कि हर टीम को भविष्य के बारे में सोचना पड़ता है. खिलाड़ियों की फॉर्म के अलावा फिटनेस, उम्र और अगले विश्व कप का रोडमैप… इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर चयनकर्ता फैसले लेते हैं. इसलिए अगर चयन समिति ने 2028 और उससे आगे की तैयारी को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरे और नई सोच अपनाई है, तो उसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या सूर्यकुमार यादव इस तरह टीम से बाहर किए जाने के हकदार थे?

यह बात खेल के आंकड़ों के लिहाज से बिल्कुल सच है कि सूर्या काफी समय से उस फॉर्म में नहीं दिख रहे थे, जिसके लिए दुनिया उन्हें ‘मिस्टर 360 डिग्री’ कहती है. पिछले कुछ महीनों से वह संघर्ष करते नजर आए. आईपीएल 2026 में भी उनके आंकड़े बहुत प्रभावशाली नहीं रहे. 13 पारियों में उन्होंने 20.76 की औसत और 147.54 की स्ट्राइक रेट से 270 रन बनाए. ये आंकड़े किसी भी शीर्ष क्रम या मध्यक्रम के बल्लेबाज के लिए बहुत शानदार नहीं कहे जा सकते. एक ऐसे बल्लेबाज के लिए जिसका खौफ गेंदबाजों के सिर चढ़कर बोलता था, ये आंकड़े यकीनन कमजोर हैं.

लेकिन किसी खिलाड़ी की पूरी कहानी सिर्फ उसके हालिया आंकड़ों से नहीं लिखी जाती. खासकर तब, जब वह खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के लिए कुछ असाधारण कर चुका हो. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह वही सूर्या हैं जो 2022 से लेकर 2024 तक भारतीय टी20 टीम के सबसे बड़े मैच विनर और संकटमोचक थे. ऐसे कई मैच थे जहां टीम मुश्किल में थी और सूर्या ने अकेले अपने दम पर मुकाबले का रुख बदल दिया. उनकी बल्लेबाजी ने भारत को एक नई पहचान दी.

बतौर कप्तान बेमिसाल

बल्लेबाज के तौर पर सूर्या का ग्राफ भले ही इस सीजन गिरा हो, लेकिन बतौर कप्तान उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग और बेमिसाल रहा है. सूर्यकुमार यादव ने 52 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारतीय टीम की कमान संभाली, जिसमें से टीम ने रिकॉर्ड 40 मुकाबलों में जीत का परचम लहराया और सिर्फ 8 मैच गंवाए. दो मैच टाई रहे और दो बेनतीजा. सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बात यह है कि सूर्या की कप्तानी में भारतीय टीम ने कभी कोई भी सीरीज नहीं हारी. महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के बाद सूर्या भारत के तीसरे ऐसे कप्तान बने जिनके नेतृत्व में देश ने टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी चूमी. यह उपलब्धि अपने आप में बताती है कि ड्रेसिंग रूम में उनकी स्वीकार्यता कितनी थी और टीम उनके नेतृत्व में कितना अच्छा प्रदर्शन कर रही थी.

अब जब श्रेयस अय्यर की अगुवाई में बीसीसीआई और सेलेक्टर्स भविष्य का रोडमैप तैयार कर रहे हैं, तो यह स्वाभाविक है कि नए चेहरों को आजमाया जाएगा और युवाओं को मौका मिलेगा. भविष्य की इस टीम में हार्दिक पंड्या जैसे बड़े नाम को भी जगह नहीं मिली है. हालांकि, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि हार्दिक को ड्रॉप नहीं किया गया है, बल्कि उनके वर्कलोड को मैनेज किया जा रहा है ताकि वे 2027 के वनडे वर्ल्ड कप के लिए पूरी तरह फिट रह सकें.

फेयरवेल तो डिजर्व करते थे सूर्या

चयनकर्ताओं की इस दूरगामी सोच पर किसी को कोई ऐतराज नहीं हो सकता. बदलाव खेल का नियम है और अगर सेलेक्टर्स भविष्य की तरफ देख रहे हैं तो यह एक स्वागत योग्य कदम है. लेकिन मेरा सवाल नीति पर नहीं, नीयत और तरीके पर है. क्या सूर्या कम से कम एक सम्मानजनक विदाई या फेयरवेल सीरीज डिजर्व नहीं करते थे?

पिछले कुछ वर्षों में हमने कई दिग्गजों को बिना किसी औपचारिक विदाई के जाते देखा है. यह ठीक उसी तरह है जैसे चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के तुरंत बाद रोहित शर्मा को भी अचानक कप्तानी से विदा कर दिया गया था. विराट कोहली जैसे दिग्गज ने भी टेस्ट क्रिकेट को लगभग अचानक अलविदा कह दिया. करोड़ों प्रशंसकों को यह एहसास तक नहीं हो पाया कि वे आखिरी बार उन्हें उस फॉर्मेट में खेलते देख चुके हैं. यहां भी वही हुआ, महज कुछ महीने पहले जिस कप्तान ने देश को टी20 वर्ल्ड कप जिताकर करोड़ों भारतीयों को झूमने का मौका दिया, उसे एक झटके में न सिर्फ कप्तानी से बेदखल कर दिया गया, बल्कि टीम के लायक भी नहीं समझा गया.

क्रिकेट जगत में यह चर्चा लाजिमी है कि क्या इस कड़े फैसले को लागू करने से पहले बीसीसीआई या सेलेक्टर्स ने सूर्या से बैठकर कोई बात की? क्या उन्हें भरोसे में लिया गया? सूर्या जैसे कद का खिलाड़ी इससे बेहतर विदाई का हकदार था क्योंकि रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों में नहीं रहते, वे यादों में भी रहते हैं और सूर्यकुमार यादव ने भारतीय क्रिकेट को ऐसी कई यादें दी हैं जो लंबे समय तक लोगों के जेहन में रहेंगी.




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