वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना दावा दोहराया है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना ”बंद” करने पर सहमति जतायी है और वह साल के अंत तक ”लगभग बंद” कर देगा. इसके साथ साथ ही ट्रंप ने कहा कि यह एक प्रक्रिया है और इसमें कुछ समय लगेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चीन को भी ऐसा करने के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे. चीन और भारत रूसी कच्चे तेल के दो सबसे बड़े खरीदार हैं.

ट्रंप ने व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, ” जैसा कि आप जानते हैं कि भारत ने मुझसे कहा है कि वे (रूसी तेल खरीदना) बंद करने जा रहे हैं… यह एक प्रक्रिया है, आप बस अचानक रुक नहीं सकते… वर्ष के अंत तक, वे इसे लगभग बंद कर देंगे, यानी लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर देंगे. भारत बहुत महान है. कल मैंने प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी से बात की. वह शानदार हैं.” पिछले कुछ दिनों से ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि भारत ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय कमी करेगा.

अमेरिका के अनुसार, भारत कच्चे तेल की खरीद के माध्यम से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है. हाल के दिनों में नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों में तनाव ब­ढ़ गया है क्योंकि ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है. भारत ने अमेरिकी कदम को ”अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” बताया है.

ट्रंप ने कहा कि वह चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी आगामी बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर उनसे चर्चा करेंगे. उन्होंने कहा, ”मैं उनसे मुख्य रूप से इस बारे में बात करूंगा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को कैसे समाप्त किया जाए, चाहे वह तेल, ऊर्जा या किसी अन्य माध्यम से हो. मुझे लगता है कि वे इसके प्रति काफी सकारात्मक रहेंगे.” राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि चीन और रूस के बीच संबंध ”थोड़े अलग” हैं. उन्होंने कहा कि बीजिंग और मॉस्को के संबंध पहले ”कभी अच्छे नहीं” थे, लेकिन यह स्थिति पूर्ववर्ती अमेरिकी प्रशासनों की नीतियों के कारण बदली है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ”चीन की स्थिति थोड़ी अलग है. उनका रूस के साथ थोड़ा अलग रिश्ता है. यह कभी अच्छा नहीं रहा है लेकिन (पूर्व राष्ट्रपति) जो बाइडन और बराक ओबामा की वजह से वे एक साथ आ गए. उन्हें कभी एक नहीं होना चाहिए था… स्वभाव से, चीन और रूस दोस्त नहीं हो सकते… बाइडन और ओबामा ने ऊर्जा और तेल के कारण उन्हें एक साथ आने पर मजबूर किया. अब वे पहले से ज्यादा करीब हैं.” ट्रंप इस महीने के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन के दौरान शी चिनफिंग से मिलने वाले हैं.

अपनी व्यापार नीति का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि शुल्कों (टैरिफ) ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है. उन्होंने कहा, ”आज हम शुल्कों के कारण एक देश के रूप में बहुत अच्छा कर रहे हैं. दशकों तक शुल्क हमारे खिलाफ इस्तेमाल किए गए और उसने धीरे-धीरे हमारे देश को कमजोर कर दिया. यही वजह है कि हम पर 37 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है. लेकिन अब शुल्कों की वजह से हम एक अमीर देश हैं. हम पहले से कहीं ज्यादा पैसा कमा रहे हैं.”

उन्होंने यह भी दावा किया कि शुल्कों ने संघर्षों को रोकने में मदद की है. उन्होंने कहा, ”मैंने आठ युद्धों को रोका. उनमें से पांच या छह केवल शुल्कों की वजह से रुके.” ट्रंप ने यह दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष को भी रोकने में मदद की थी. उन्होंने कहा, ”मैंने दोनों देशों से कहा कि अगर आप लड़ना चाहते हैं, तो ठीक है लेकिन आपको शुल्क देना होगा. दो दिन बाद उन्होंने फोन किया और कहा कि वे अब नहीं लड़ेंगे. अब उनके बीच शांति है.” हालांकि, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम समझौता मई में दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से हुआ था तथा इसमें किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं था.

अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए

रूस पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का दबाव ब­ढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिका ने मास्को की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को यह घोषणा करते हुए मास्को की “निरर्थक युद्ध” समाप्त न करने की जिद की कड़ी आलोचना की. बेसेंट ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकोइल सहित दर्जनों सहायक कंपनियों पर लगाए गए ये प्रतिबंध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महीनों से पड़ रहे द्विदलीय दबाव के बाद लगाए गए हैं, जिसमें रूस के तेल उद्योग को और कड़े प्रतिबंधों के दायरे में लाने की मांग की जा रही थी.

उन्होंने कहा, “यह समय हत्या बंद करने और तत्काल युद्धविराम का है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा इस निरर्थक युद्ध को समाप्त करने से इनकार करने के मद्देनजर, वित्त मंत्रालय रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, जो क्रेमलिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित करती हैं.” बेसेंट ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वित्त मंत्रालय अतिरिक्त कार्रवाई करने को तैयार है, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को समर्थन मिल सके. उन्होंने कहा, “हम अपने सहयोगियों से अपील करते हैं कि वे भी इन प्रतिबंधों में हमारे साथ शामिल हों और इनका पालन करें.” बेसेंट ने यह टिप्पणी उस समय की जब नाटो महासचिव मार्क रुटे वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से वार्ता के लिए मौजूद थे. नाटो गठबंधन यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति के समन्वय में लगा है, जिनमें से कई हथियार कनाडा और यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिका से खरीदे गए हैं.

प्रतिबंध की यह घोषणा ऐसे समय आई जब रूसी ड्रोन और मिसाइलों ने यूक्रेन के कई हिस्सों को निशाना बनाया. इन हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला और उसकी दो छोटी बेटियां शामिल थीं. यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले मंगलवार रात से बुधवार तक हुए और कम से कम आठ शहरों के साथ-साथ राजधानी कीव क्षेत्र के एक गांव को भी निशाना बनाया गया. क्षेत्रीय प्रमुख मायकोला कालाशनिक के अनुसार, एक हमले में एक घर में आग लग गई, जिसमें मां और उसकी छह महीने और 12 साल की बेटियां मौजूद थीं. कीव प्रशासन ने बताया कि हमलों में कम से कम 29 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं.

खारकीव शहर में एक किंडरगार्टन पर भी बुधवार को ड्रोन हमला हुआ, जब बच्चे अंदर मौजूद थे. मेयर इहोर तेरखोव ने बताया कि एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए. बच्चों को शारीरिक रूप से कोई नुकसान नहीं पहुंचा. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि कई बच्चे सदमे की स्थिति में हैं. उन्होंने बताया कि रूस ने 10 क्षेत्रों-कीव, ओडेसा, चेरनिहाइव, दिनिप्रोपेत्रोव्स्क, कीरोवोह्राद, पोल्टावा, विनित्सिया, ज.ापोरिज्जिया, चेरकासी और सूमी-को निशाना बनाया. यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस ने कुल 405 ड्रोन तथा 28 मिसाइलें दागीं, जिनका प्रमुख लक्ष्य कीव था.

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version