राष्ट्रवाणी: क्या भारत में लागू हैं 2-चाइल्ड पॉलिसी?
- भारत में भले ही इसपर खूब बात हुई है।
- भारत के कुछ राज्यों में दो से ज्यादा बच्चे होने पर सब्सिडी और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना, सरकारी नौकरी न मिलना जैसे नियम हैं।
भारत में भले ही इसपर खूब बात हुई है. लेकिन भारत में केंद्रीय स्तर पर कोई ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ लागू नहीं है. हालांकि भारत के कई राज्य अपने-अपने स्तर पर इस पॉलिसी को लागू करते हैं. कुछ भारतीय राज्यों ने स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत के चुनावों में सरकार नौकरियों के लिए नियम बनाए हैं. भारत में किस-किस राज्य में लागू है ये नीति
भारत के कुछ राज्यों में दो से ज्यादा बच्चे होने पर सब्सिडी और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना, सरकारी नौकरी न मिलना जैसे नियम हैं. असम के पूर्व मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा दो बच्चों की नीति के प्रबल समर्थक रहे हैं. साल 2021 के नियमों के बाद राज्य में दो से ज्यादा बच्चे होने पर व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता है. महाराष्ट्र में भी टू चाइल्ड पॉलिसी को लेकर कड़े नियम हैं. 2001 का गवर्नमेंट रेजोल्यूशन साफ कहता है कि अगर किसी कर्मचारी के दो से से ज्यादा बच्चे हैं तो उसकी मौत के बाद उसके परिवार के किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाएगी. इसी तरह से यहां दो से ज्यादा बच्चे होने पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध है. महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान में भी इस पॉलिसी के कड़े नियम हैं. यहां भी दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए पात्रता छिन जाती है. साथ ही राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के दो से ज्यादा बच्चे हैं तो उसे ग्राम पंचात या वार्ड सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने में आयोग्य माना जाता है. मध्यप्रदेश में भी इसी तरह के नियम लागू थे. लेकिन जून, 2026 में ही सरकार ने 23 साल पुराने दो-बच्चों वाले नियम को खत्म करने का फैसला लिया है. हालांकि मध्य प्रदेश ने 2005 में स्थानीय निकाय चुनावों के उम्मीदवारों की कई आपत्तियों के बाद चुनाव न लड़ने देने का नियम तभी खत्म कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर को आए फैसले की सुनवाई के दौरान अदालत को राज्यों के कानूनों की जानकारी भी दी गई. इस जानकारी के अनुसार भारत में सात राज्य दो-बच्चे की शर्त खत्म कर चुके हैं. जबकि 15 राज्यों में ऐसी कोई नीति है ही नहीं. वहीं असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह प्रावधान अब भी लागू होने की जानकारी दी गई है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

