नयी दिल्ली. कनाडा की एक खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्सी के दशक के मध्य से कनाडा में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ का खतरा खालिस्तानी चरमपंथियों के माध्यम से प्रकट हुआ है, जो भारत के पंजाब प्रांत के भीतर खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राष्ट्र के गठन के वास्ते हिंसक साधनों का उपयोग करना चाहते हैं. एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी चरमपंथियों का एक छोटा समूह कनाडा का इस्तेमाल धन जुटाने और मुख्य रूप से भारत में हिंसा की योजना बनाने के लिए अड्डे के तौर पर कर रहा है.

कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा की 2024 की रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई. इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया. दोनों देशों के बीच उस वक्त राजनयिक संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए थे, जब एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर विवाद पैदा हो गया था.

रिपोर्ट में कहा गया कि कनाडा के खालिस्तानी चरमपंथियों का हिंसक गतिविधियों में बदस्तूर भाग लेना कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा और इसके हितों के लिए खतरा बना हुआ है. इसमें कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप के तौर पर भारत की गतिविधियों की भी आलोचना की गई है. यह रिपोर्ट भारत के उस निरंतर रुख की पुष्टि करती प्रतीत हुई कि कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्व भयमुक्त होकर भारत-विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्सी के दशक के मध्य से कनाडा में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ का खतरा खालिस्तानी चरमपंथियों के माध्यम से प्रकट हुआ है, जो भारत के पंजाब प्रांत के भीतर खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राष्ट्र के गठन के वास्ते हिंसक साधनों का उपयोग करना चाहते हैं.

इस रिपोर्ट में भारत संबंधी खंड के तहत आरोप लगाया गया है, ”भारतीय अधिकारी, जिनमें उनके कनाडा स्थित प्रॉक्सी एजेंट शामिल हैं, कई तरह की गतिविधियों में शामिल हैं, जो कनाडाई समुदायों और राजनेताओं को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं.” इसमें दावा किया गया है कि जब ये गतिविधियां भ्रामक, गुप्त या धमकी देने वाली होती हैं, तो उन्हें विदेशी हस्तक्षेप माना जाता है. भारत पूर्व में भी कनाडाई अधिकारियों द्वारा लगाए जाने वाले इस तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कनाडा के लिए सबसे बड़ा खुफिया खतरा चीन है. रिपोर्ट में इसके अलावा पाकिस्तान, रूस और ईरान का भी नाम लिया गया है.

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