मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को कहा कि भारत के बैंक और उनकी विदेशी शाखाएं अब भूटान, नेपाल और श्रीलंका में रहने वाले व्यक्तियों और बैंकों को भारतीय रुपये में ऋण मुहैया करा सकती हैं. आरबीआई ने एक बयान में कहा कि यह कदम विदेशी विनिमय प्रबंधन (उधारी एवं ऋण) विनियम, 2018 और विदेशी मुद्रा खाता प्रबंधन विनियम, 2015 में संशोधनों के तहत उठाया गया है. इसका उद्देश्य ‘बाहरी व्यापार और भुगतान को सुगम बनाना’ है.

रिजर्व बैंक ने कहा, ”भारत में अधिकृत डीलर बैंकों और उनकी विदेशी शाखाओं को अब भूटान, नेपाल और श्रीलंका में रहने वाले व्यक्तियों और बैंकों को रुपये में ऋण देने की अनुमति है, ताकि सीमापार व्यापार लेनदेन को सुविधाजनक बनाया जा सके.” इसके अलावा जनवरी, 2025 में आरबीआई ने भारतीय निर्यातकों को यह मंजूरी दी थी कि वे विदेशों में किसी बैंक में विदेशी मुद्रा खाते खोलकर अपने निर्यात प्राप्तियों को संग्रहीत कर सकें. इन खातों में अप्रयुक्त शेष राशि को अब तक अगले महीने के अंत तक वापस भेज देना अनिवार्य था.

हालांकि, आरबीआई ने अब इस अवधि को ब­ढ़ाकर तीन महीने कर दिया है, यदि विदेशी मुद्रा खाता भारत के आईएफएससी में किसी बैंक में रखा गया हो. आरबीआई ने एक अक्टूबर, 2025 को अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा के दौरान इस कदम की घोषणा की थी.

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version