राष्ट्रवाणी (बीजापुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, अंबिकापुर। ‘मोर छोटे बेटा भी तो रहिस लेकिन बहुरिया कहिस की मैं जिनगी भएर तोमन के सेवा सत्कार करहूं कोई दिक्कत नी हो ही। हमहू मन थोड़े जानत रहें बेटा की येकस मोर बहुरिया हर बदेल जाही.. नहीं तो छोटे बेटा ला नउकरी ला करुआतें..’।
यह कहना है बलिदानी रामशंकर सिंह की बुजुर्ग मां दुलारो बाई का। सरगुजिहा बोली में कहे गए इस एक वाक्य में एक मां का पूरा जीवन, उसका भरोसा और फिर टूटा हुआ विश्वास समाया हुआ है। उनका आशय है कि बहू ने जीवन भर देखभाल करने का वादा किया था।
उस पर भरोसा कर हमने बलिदानी बेटे के बदले उसे नौकरी के लिए हां कर दी थी। यदि पता होता की वह ऐसे मुंह फेर लेगी तो हम अपने छोटे बेटे की नौकरी के लिए हामी भरते।जीवन के अंतिम पड़ाव पर 68 वर्षीय दुलारो बाई और उनके 76 वर्षीय पति बुधराम आज अपने छोटे बेटे के कच्चे मकान में आर्थिक अभावों से जूझते हुए किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं।
बेटे रमाशंकर ने आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सरकार ने भी सुध ली लेकिन बलिदानी बेटे की पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति और आर्थिक सहायता मिलते ही मुंह फेर लिया। बुजुर्ग दंपती अब बेटे की याद के सहारे जीवन के अंतिम समय में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष याचना कर रहे हैं कि कमाऊ बेटा तो देश की खातिर बलिदान हो गया ऐसे में बेटे के कारण बहू को जो नौकरी मिली उसका कुछ हिस्सा उन्हें भी मिले लेकिन अधिकारी भी इस प्रकरण में समझाइश देने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
इनका आरोप है कि बलिदानी बेटे की बदौलत बहू ने संपत्ति बना ली है, सुख-सुविधा के साथ जीवन यापन कर रही है, लेकिन उनका जीवन इतना कष्टप्रद हो गया है कि बता पाना संभव नहीं है। छोटा बेटा जय सिंह मेहनत मजदूरी कर अपने माता-पिता की देखभाल कर रहा है। उसका कहना है कि भाभी ने भले उनका साथ छोड़ दिया लेकिन वे अपने माता-पिता को कभी नहीं छोड़ेंगे।
सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद के अमदला गांव निवासी बलिदानी जवान रामशंकर सिंह स्पेशल टास्क फोर्स में पदस्थ थे। तीन मार्च 2021 को बीजापुर में माओवादियों से मुठभेड़ में वे बलिदान हो गए थे। शासन ने उनकी पत्नी को भरण-पोषण की शर्त पर एसपी कार्यालय अंबिकापुर में सहायक उप निरीक्षक (एम) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी है।
बलिदानी रमाशंकर के माता-पिता का आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद बहू ने अंबिकापुर में अलग मकान बनवा लिया है और बेटे द्वारा बनवाए मकान में ताला लगा दिया है। वह ससुराल आती-जाती भी नहीं है। आर्थिक सहायता और वेतन से कार, ट्रैक्टर, जमीन, फिक्स्ड डिपॉजिट बना ली है, पर बुजुर्गों की सुध नहीं ले रही है।
जरूरी दस्तावेज तक नहीं दे रही है। इन्होंने बेटे द्वारा तैयार मकान का ताला खुलवाने तथा बहू को मिलने वाली वेतन का हिस्सा दिलवाने की मांग की है।इसको लेकर उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर और एसएसपी सरगुजा को ज्ञापन भी सौंपा है।

