राष्ट्रवाणी (छत्तीसगढ़ ब्यूरो): नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद ईरान के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. रिपब्लिकन पार्टी को मिले झटके और दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत हासिल करने के बाद ईरान के नेताओं का मानना है कि अमेरिकी जनता ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए युद्ध और बढ़ती महंगाई को पूरी तरह खारिज कर दिया है. हालांकि, इस राजनीतिक बदलाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी आए, वाशिंगटन का तेहरान के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया बदलने वाला नहीं है. मध्यावधि चुनावों के दौरान अमेरिकी मतदाताओं में राष्ट्रपति ट्रंप की आर्थिक नीतियों और युद्ध की वजह से बढ़ी गैस की कीमतों को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली. चुनाव में जीत के बाद ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बकिर कलीबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि अमेरिकी लोगों ने अपने विवेक और जीवन यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए इस युद्ध को नकार दिया है. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि अमेरिकी नेतृत्व में बदलाव से नीतियां बदल जाएंगी, वे बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं. उन्होंने देश को अमेरिका के सामने थोड़ा भी झुकने से मना किया है और कहा कि यदि अमेरिका फिर से कोई आक्रामकता दिखाता है, तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक और विनाशकारी होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी आधिपत्य का अंत अब निकट है. दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के अनुसार, डेमोक्रेट्स की जीत के बावजूद तेहरान इस बात को लेकर चिंतित है कि ट्रंप अपनी इस विफलता की भरपाई किसी नए सैन्य हमले से कर सकते हैं, इसलिए ईरानी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है. ईरानी मीडिया और समाचार पत्रों ने इस चुनाव परिणाम को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है. प्रमुख ईरानी समाचार पत्र ‘हमशहरी’ ने अपने मुख्य पृष्ठ पर एक विशेष तस्वीर के साथ लिखा कि वाशिंगटन पिछले 47 वर्षों से ईरान का बंदी बना हुआ है, जिसकी शुरुआत 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे से हुई थी और जो अब 2026 के चुनाव नतीजों तक जारी है. वहीं एक अन्य रूढ़िवादी समाचार पत्र ‘जाम-ए-जाम’ ने इन नतीजों को ‘ट्रंपवाद का सूर्यास्त’ करार दिया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से ही पूरा क्षेत्र भीषण संघर्ष की चपेट में है. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों वाले खाड़ी देशों पर हमले किए. यह संघर्ष अब लेबनान और यमन तक फैल चुका है, जहां से हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव डाला है. गुरूवार, 05 नवम्बर 2026 गुरू, 05 नव. 2026 | 08:40 AM खबरें, वीडियो और शॉर्ट्स — एक ही जगह ब्रेकिंग न्यूज़ और बड़ी खबरें सबसे पहले आपके पास।
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