राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का आज 26 जुलाई 2026 को 136वां एपिसोड था। कारगिल विजय दिवस: आज के दिन प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर जवानों और शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जल संरक्षण: पीएम मोदी ने जल संचयन के महत्व को दोहराते हुए ‘कैच द रेन’ अभियान की सराहना की और कोरबा मॉडल के सराहना की और नागरिकों से बारिश के पानी को सहेजने का आग्रह किया। औद्योगिकीकरण और तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के बीच कोरबा जिले ने भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए एक नजीर पेश की है। बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए चलाए जा रहे महाअभियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जमकर तारीफ की है। जल संकट से निपटने के लिए बारिश के पानी को सहेजने की अनूठी मुहिम शुरू की गई है। केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ और राज्य के ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन तथा नगर पालिक निगम कोरबा वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। बारिश की हर बूंद को जमीन के भीतर उतारने के लिए शहर से लेकर वनांचल तक चौतरफा प्रयास जारी हैं। जल संचयन के लिए किए जा रहे कोरबा में मुख्य कार्य को ऐसे समझें हम…… सरकारी भवनों में रूफटॉप हार्वेस्टिंग शहर के सार्वजनिक, सामुदायिक और शासकीय कार्यालयों सहित 109 प्रमुख सरकारी इमारतों में रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट का तेजी से निर्माण कराया जा रहा है ताकि वर्षा जल व्यर्थ न बहे। रीचार्ज बेड और रीचार्ज वेल का निर्माण भूजल स्तर को तेजी से पुनर्भरण (रिचार्ज) करने के लिए जिले के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक रीचार्ज बेड और रीचार्ज वेल तैयार किए गए हैं, जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम द्वारा शहर में बेकार और ठप पड़े 95 बंद बोरवेलों को वॉटर रिचार्ज शाफ्ट में बदला जा रहा है। इससे बेकार पड़े संसाधन अब सीधे जमीन के भीतर पानी भेजने का जरिया बन रहे हैं। नए निर्माणों में हार्वेस्टिंग अनिवार्य नगरीय निकायों द्वारा शहर में किसी भी नए निजी या व्यावसायिक भवन के निर्माण की अनुमति देने से पहले वॉटर हार्वेस्टिंग पिट का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। हसदेव नदी का संरक्षण और रीसाइक्लिंग मॉडल 111 करोड़ की लागत से शहर के 11 प्रदूषित नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है। इस उपचारित पानी को उद्योगों (NTPC) को बेचा जाएगा, जिससे हसदेव नदी से ताजे पानी का दोहन कम होगा। वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के माध्यम से सोख्ता गड्ढे, डबरी और तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि बारिश का पानी गांवों का पानी गांवों में ही सिमट कर रहे।

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