राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, जशपुरनगरः समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की समिति ने शुक्रवार को जिले की जनता व विभिन्न सामाजिक संगठनों से चर्चा। इस चर्चा में जहां महिलाओं को ढुकू प्रथा,लीव इन रिलेशपन और बहु विवाह से होने वाली समस्याओं से संरक्षित करने पर सामाजिक संगठनों के साथ जिले के प्रबुद्वजनों ने भी सहमति जताई।
वहीं, विवाह,तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में आदिवासी संगठनों ने उनकी परम्परा और रूढ़ियों को संरक्षित करने की मांग उठाई। वहीं कुछ आदिवासी संगठनों ने आदिवासियों को यूसीसी से अलग रखने का सुझाव भी दिया। समिति की बैठक का आयोजन जिला पंचायत के सभागार में किया गया था।
बैठका का शुभारंभ सरगुजा संभाग के आयुक्त नरेंद्र दुग्गा ने स्वागत भाषण से किया। इसके बाद उच्च स्तरीय समिति के सचिव और रायपुर संभाग के कमीश्नर श्याम धावड़े ने सदस्यों का परिचय कराया। आदिवासी महासभा की ओर अभिनंदन खलखों ने यूसीसी लागू करने के दौरान आदिवासियों की विशिष्ट परम्परा व रूढ़ियों को संरक्षित करना आवश्यक है।
उन्होनें कहा कि संविधान के 44 वें अनुच्छेद में वर्णित नीति निदेशक तत्वों में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। यह नागरिकों को दिया गया अधिकार नहीं है। इसे चरणबद्व तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
पत्थलगांव ब्लाक के किलकिला से आए किशोर यादव ने कहा कि अंर्तजातिय विवाह और लीव इन रिलेशनशीप का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए विवाह का पंजियन की सख्त व्यवस्था करना आवश्यक है। उन्होनें लीव इन रिलेशनपशीप के मामले में युवक व युवतियों के माता-पिता को आवश्यक रूप से सूचना देने का प्रविधान करने का सुझाव दिया,जिससे किसी असमान्य स्थिति में संपर्क बना रह सके।
अखिल भारतीय रौतिया समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश साय ने यूसीसी का समर्थन करते हुए समान कानून को आवश्यक बताया। उन्होनें कहा कि ढुकु प्रथा,लीव इन रिलेशन की समस्या से निबटने के लिए विवाह का पंजिकरण आवश्यक है। कायस्थ समाज के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश सिन्हा ने कहा कि समाज में बेटियों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए यूसीसी आवश्यक है।
जिला अधिवक्ता संघ के सचिव सत्य प्रकाश तिवारी ने यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि विवाह,तलाक और संपत्ति का अधिकार जैसे मामलों में अलग-अलग कानून होने से न्यायालय के समक्ष कानूनी पेचिदिगियां उत्पन्न होती है। इससे पीड़ित पक्ष को सही समय में न्याय मिलने में विलंब भी हो सकता है। इन समस्या का एक ही समाधान समान नागरिक संहिता है।
जनपद पंचायत जशपुर के पूर्व अध्यक्ष शशि भगत ने यूसीसी की मंशा अच्छी है। लेकिन रूढ़ियों और परम्पराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होनें कहा कि विवाह की पंजियन की व्यवस्था करना आवश्यक है।
विमर्श के दौरान मुरारी लाल अग्रवाल,डा अभय बैरागी,उदित मिंज सहित अन्य लोगों ने भी समिति के समक्ष अपने विचार व सुझाव प्रस्तुत किये। बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. ज्योति रानी सिंह, उच्च स्तरीय समिति के सचिव एवं आयुक्त रायपुर संभाग श्याम लाल धावड़े तथा सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, उपस्थित रहे।
जशपुर की विधायक रायमुनि भगत ने समिति के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखते हुए कहा कि एक परिवार में दो कानून किसी भी तरह से उचित नहीं है। उन्होनें कहा कि जो आदिवासियों की परम्परा और रूढ़ियों को छोड़ चुके हैं उन्हें आदिवासी नहीं माना जा सकता। लीव इन रिलेशन और बहु विवाह जैसे बढते हुए मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होनें कहा कि यूसीसी में विवाह पंजियन,तलाक और संपत्ति पर अधिकार को लेकर स्पष्ट कानून बना कर ही,इन समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है।
‘‘जिला पंचायत के सभागार में आयोजित समूह चर्चा में विभिन्न सामाजिक संगठन व प्रबुद्व जनों ने यूसीसी पर अपने विचार और सुझाव रखे हैं। इसे समिति द्वारा सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।’’ मोहन पवार,सदस्य,यूसीसी उच्च स्तरीय समिति।
