बिलासपुर, 18 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक
महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बिना पेनिट्रेशन (प्रवेश) के केवल इजैक्युलेशन (वीर्यपात) होना रेप नहीं माना जाएगा। कानून के मुताबिक यह कृत्य रेप की कोशिश की श्रेणी में आएगा, न कि पूर्ण रेप के अपराध में।

यह फैसला न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने वासुदेव गोंड विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार मामले में सुनाया।

यह घटना वर्ष 2004 की है। धमतरी में ट्रायल कोर्ट ने 2005 में आरोपी को पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने का दोषी मानते हुए 7 साल की सजा सुनाई थी।

लेकिन हाईकोर्ट में अपील के दौरान पीड़िता ने जिरह में कहा कि आरोपी ने अपना निजी अंग उसकी योनि के ऊपर रखा था, परंतु अंदर प्रवेश नहीं किया था।

अदालत ने अपने 16 फरवरी के फैसले में कहा कि रेप के अपराध के लिए पेनिट्रेशन आवश्यक है, इजैक्युलेशन नहीं। बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेशन को रेप की कोशिश माना जाएगा, रेप नहीं।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत सजा के लिए हल्का पेनिट्रेशन भी पर्याप्त हो सकता है, लेकिन यह साबित करने के लिए ठोस और स्पष्ट साक्ष्य होना जरूरी है कि आरोपी के अंग का कोई हिस्सा महिला के जननांग के अंदर गया था।

मेडिकल जांच में पीड़िता की हाइमन फटी हुई नहीं पाई गई। डॉक्टर ने कहा कि योनि में केवल उंगली का सिरा डाला जा सकता था, जिससे आंशिक पेनिट्रेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मेडिकल साक्ष्य से रेप की पुष्टि नहीं होती। पीड़िता के बयान में भी विरोधाभास था। एक चरण में उसने प्रवेश की बात कही, जबकि बाद में कहा कि आरोपी ने लगभग 10 मिनट तक निजी अंग ऊपर रखा था, पर प्रवेश नहीं किया।

अदालत ने माना कि यह साक्ष्य रेप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त है।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदलते हुए आरोपी को रेप की जगह “रेप की कोशिश” का दोषी ठहराया।

सजा घटाकर 3 साल 6 महीने कर दी गई। आरोपी को दो महीने के भीतर सरेंडर कर शेष सजा काटने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी ट्रायल के दौरान 3 जून 2004 से 6 अप्रैल 2005 तक जेल में रहा था। बाद में 6 जुलाई 2005 को उसे जमानत मिली।

उसे पहले काटी गई अवधि का लाभ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 अथवा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 468 के तहत मिलेगा।

दोषी की ओर से अधिवक्ता राहिल अरुण कोचर और लीकेश कुमार पेश हुए, जबकि राज्य की ओर से अधिवक्ता मनीष कश्यप ने पैरवी की।

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version