राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय नगर के सेक्टर-2 में बुधवार को सांड ने जमकर उत्पात मचाया। सांड ने घर के बाहर बच्चे को गोद में लेकर खड़े बुजुर्ग देवनारायण शर्मा पर हमला कर दिया।
सींग से टक्कर मारने के बाद सांड ने उन्हें जमीन पर गिराया और करीब तीन बार उठाकर पटक दिया। अचानक हुए हमले से बुजुर्ग के हाथ से एक साल का पोता नीचे गिर गया। बच्चे को भी चोट आई है।
गंभीर रूप से घायल देवनारायण को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, सांड ने कंचनगंगा फेस-2, सेक्टर-2 और बंजारी नगर क्षेत्र में करीब 15 लोगों पर करारा जवाब देते हुए तीखा हमला बोला । इनमें कांग्रेस की पूर्व महिला अध्यक्ष कल्पना पटेल भी शामिल हैं।
सांड के हमले में सभी को चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांड अचानक लोगों की ओर दौड़ रहा था। इससे क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति रही।
सांड के उत्पात की सूचना मिलने पर नगर निगम जोन क्रमांक-5 की टीम काउ कैचर के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने दिनभर सांड को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद निगम ने वन विभाग से मदद मांगी।
वन विभाग-जंगल सफारी की टीम और भाठागांव पशु चिकित्सालय के डा. दिनेश पटेल मौके पर पहुंचे। टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन से सांड को बेहोशी का इंजेक्शन दिया। इसके बाद सांड को सुरक्षित तरीके से काबू में लिया गया।
उसे उपचार और निगरानी के लिए जोन-5 के अधिकारियों को सौंप दिया गया। शहर की सड़कों और रहवासी इलाकों में बेसहारा मवेशियों का जमावड़ा राहगीरों के लिए परेशानी के साथ हादसे का खतरा भी बढ़ा रहा है। मुख्य मार्गों, चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में मवेशी सड़क पर बैठे या घूमते नजर आते हैं।
रात के समय वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर मवेशियों की धरपकड़ कर उन्हें कांजी हाउस और गौठानों में भेजने का अभियान चलाया जाता है। इसके बावजूद कुछ समय बाद मवेशी फिर सड़कों पर नजर आने लगते हैं।
निगम ने शहर के सभी 10 जोनों में धरपकड़ अभियान चलाने और सड़क पर मवेशी छोड़ने वाले पशु मालिकों पर कार्रवाई की बात कही है। सड़क किनारे और खाली स्थानों पर खुले में पड़ा कचरा भी मवेशियों के जमावड़े का एक कारण है। जिन स्थानों पर नियमित रूप से मवेशी जमा होते हैं, वहां कचरा प्रबंधन के साथ निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
मवेशियों को पकड़ने के साथ उन्हें सड़क पर छोड़ने वाले पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। बार-बार मवेशी छोड़ने वालों पर कार्रवाई, पर्याप्त क्षमता वाले आश्रय स्थल और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी से समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

