नयी दिल्ली. मलेशिया में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) में दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की ब­ढ़ती आक्रामक सैन्य गतिविधियों को लेकर चीन को परोक्ष संदेश देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों के निपटारे का पुरजोर आह्वान किया गया.

ईएएस ने सोमवार को कुआलालंपुर में अपने वार्षिक शिखर सम्मेलन के समापन पर एक घोषणापत्र में यह बात कही. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस अवसर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया. आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) के सदस्य देशों के अलावा, भारत, चीन, जापान, कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और रूस भी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं.

सोमवार को शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में जयशंकर ने बाजार पहुंच, ऊर्जा व्यापार में लगातार ‘कमी’ और मानदंडों के चयनात्मक इस्तेमाल से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, ”आपूर्ति श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता और बाजारों तक पहुंच को लेकर चिंताएं ब­ढ़ रही हैं. तकनीकी प्रगति बहुत प्रतिस्पर्धी हो गई है, जबकि प्राकृतिक संसाधनों की खोज तो और भी अधिक प्रतिस्पर्धी हो गई है.

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