राष्ट्रवाणी: राज्य ब्यूरो, , रायपुर। छत्तीसगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की दौड़ में शामिल होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश को 40वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी दिलाने के लिए सरकार पूरी ताकत से प्रयास करेगी।
इसी सिलसिले में शनिवार को राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ की अहम बैठक हुई, जिसमें मेजबानी की संभावनाओं और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ को 40वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिलती है, तो यह प्रदेश के खेल ढांचे के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
सरकार की योजना है कि सिर्फ राजधानी तक ही खेलों को सीमित न रखा जाए, बल्कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी कुछ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए। इससे न सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि बस्तर की नई पहचान भी बनेगी। गौरतलब है कि इससे पहले साल 2010 में छत्तीसगढ़ को 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली थी, लेकिन तैयारियां पूरी न होने के कारण यह मौका हाथ से निकल गया था।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों, वनांचलों और दूर-दराज के इलाकों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें सही समय पर पहचान कर बेहतर ट्रेनिंग और आधुनिक सुविधाएं देने की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों और अवसरों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
इस बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप, दुर्ग सांसद विजय बघेल और छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में जिला ओलिंपिक संघों के गठन और आने वाले समय की खेल गतिविधियों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि शासन और ओलिंपिक संघ के बीच बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को बड़े उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल की जा रही है, ताकि सीएसआर फंड और अन्य माध्यमों से खेलों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकें। प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं।
रायपुर में करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी बन रही है। वहीं जशपुर के पंडरापाठ में 20 से 25 करोड़ रुपये की लागत से एक और आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जाएगा। जशपुर अंचल में, खासकर पहाड़ी कोरवा समुदाय में तीरंदाजी एक परंपरा है, ऐसे में इन अकादमियों से वनांचल की प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिलेगा।
दूरदराज की प्रतिभाओं को तराशने के लिए सरकार ने बस्तर ओलिंपिक को हर साल आयोजित करने का फैसला लिया है। साथ ही ‘खेल उत्कर्ष मिशन’ के जरिए गांव-गांव से खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सहयोग देने के लिए राज्य में ‘खेल अलंकरण समारोह’ की भी फिर से शुरुआत की जाएगी।
छत्तीसगढ़ इससे पहले भी राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की कोशिश कर चुका है। 2010 में भारतीय ओलंपिक संघ ने 37वें राष्ट्रीय खेल छत्तीसगढ़ को दिए थे, लेकिन निरीक्षण में तैयारियां अधूरी मिलने पर मेजबानी वापस ले ली गई थी। बाद में 39वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी गुजरात को दी गई।
ऐसे में 40वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिलना छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा।

