राष्ट्रवाणी: भारत ने चीन से ग्लाइसिन के आयात पर डंपिंग-रोधी जांच शुरू की है, जिसका उपयोग दवा और स्वाद बढ़ाने वाले …और पढ़ें भारत ने चीन से ग्लाइसिन आयात पर डंपिंग-रोधी जांच शुरू की। एविड ऑर्गेनिक्स की शिकायत पर वाणिज्य मंत्रालय ने जांच शुरू की। सीपीवीसी रेजिन आयात पर डंपिंग शुल्क से बचने की भी जांच।
एजेंसी, नई दिल्ली। भारत ने चीन से ग्लाइसिन के आयात के खिलाफ डंपिंग-रोधी जांच शुरू की है। ग्लाइसिन का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में और दवा उद्योग में एक घटक के तौर पर किया जाता है।
वाणिज्य मंत्रालय के तहत व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने मंगलवार को एक अधिसूचना में कहा कि यह जांच घरेलू विनिर्माता एविड ऑर्गेनिक्स की शिकायत पर शुरू की गई है। कंपनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि चीन से डंप किए जाने वाले आयात से उसे गंभीर नुकसान हो रहा है। कंपनी ने इन आयात पर डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने का अनुरोध किया है।
डीजीटीआर यह जांच करेगा कि संबंधित उत्पाद को सामान्य कीमत से कम कीमत पर भारत में बेचा गया है या नहीं, ऐसी डंपिंग कितनी हुई है और इसका घरेलू उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ा है। डंपिंग से घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान पाए जाने पर डीजीटीआर आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश कर सकता है।
हालांकि, शुल्क लगाने पर अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय करता है। एक अन्य अधिसूचना में डीजीटीआर ने कहा कि चीन और दक्षिण कोरिया से आयात होने वाले क्लोरीनेटेड पॉलीविनाइल क्लोराइड (CPVC) रेजिन पर लगाए गए डंपिंग रोधी शुल्क को दरकिनार किए जाने के आरोपों की जांच शुरू की गई है। सीपीवीसी रेजिन का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक पाइपिंग कार्यों में किया जाता है।
डीसीडब्ल्यू लिमिटेड, एपिग्राल लिमिटेड और लुब्रिजोल एडवांस्ड मैटेरियल्स इंडिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि चीन और दक्षिण कोरिया से संबंधित उत्पाद पर लगाए गए डंपिंग रोधी शुल्क को जापान, मलेशिया और थाइलैंड के रास्ते आयात कर दरकिनार किया जा रहा है।
