नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि बिहार में जारी मतदाता सूची की विशेष व्यापक पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया सुनियोजित चाल है, जिसका मकसद बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करके चुनावों में धांधली करना है. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार में एक पत्रकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का हवाला देते हुए सवाल किया कि यह क्या ‘इलेक्शन कमीशन (निर्वाचन आयोग)’ है या फिर पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी की ‘इलेक्शन चोरी’ शाखा बन चुका है.
बिहार के बेगूसराय में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. यह कार्रवाई उनके यूट्यूब चैनल पर 12 जुलाई को अपलोड किए गए एक वीडियो के आधार पर की गई है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “बिहार में चुनाव आयोग एसआईआर के नाम पर वोट चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया. काम सिफ.र् चोरी, नाम एसआईआर- पर्दाफाश करने वाले पर होगी एफआईआर.” उन्होंने सवाल किया कि क्या निर्वाचन आयोग ‘इलेक्शन कमीशन’ है या यह पूरी तरह भाजपा की ‘इलेक्शन चोरी’ शाखा बन चुका है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक यूट्यूब वीडियो साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”यह अशोक लवासा हैं, जो 2018 से 2020 तक चुनाव आयुक्त रहे, वह बिहार में जारी एसआईआर अभ्यास की सच्चाई उजागर कर रहे हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया, ”मतदाता सूची के इस विशेष व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया एक सुनियोजित और धूर्ततापूर्ण चाल है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करके चुनावों में धांधली करना है. जिस प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की थी, वही अब वोटबंदी को अंजाम दे रहे हैं.” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि जनता पूछ रही है क्या एसआईआर के नाम पर बिहार में ‘वोटबंदी’ लागू की जा रही है?
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया में भयंकर ?अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है. जनता में अफरा-तफरी का माहौल है और चुनाव आयोग सारे सवालों पर मौन है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि चुनाव आयोग किसके लिए काम कर रहा है और उसका मकसद क्या है?” कांग्रेस नेता ने दावा किया, ”याद रहे, पहले भी देश की जनता ने संविधान को कुचलने की हर कोशिश को नाकाम किया है और इस बार भी नाकाम करेगी.”
विदेश नीति पर भारत के पारंपरिक रुख से हटी सरकार, संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए: कांग्रेस
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर विदेश नीति के संदर्भ में भारत के पारंपरिक रुख से पीछे हटने और राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति नहीं बनाने का आरोप लगाया तथा यह भी कहा कि इस विषय संसद के मानसून सत्र में व्यापक चर्चा होनी चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने दावा किया कि मौजूदा विदेश नीति में ‘बिखराव’ के कारण विश्व स्तर पर भारत का असर कम हो रहा है.
शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ”भारत की विदेश नीति में जैसा बिखराव है, उस वजह से भारत का प्रभाव विश्व में कम हो रहा है. यह सबके लिए दुख की बात है.” उन्होंने इस बात का उल्लेख किया, ”भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया. दुनिया के जिन देशों और महाद्वीपों में आजादी के लिए, रंगभेद के खिलाफ बड़े संघर्ष हुए, उन्होंने भारत की अगुवाई को माना, भारत की आवाज को सुना- चाहे वह अफ्रीका हो, लैटिन अमेरिका हो या एशिया के देश हों.” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”जब हम राष्ट्रहित को आगे रखते हैं, तो उसके पीछे एक आम सहमति देश की रहती है, लेकिन मौजूदा सरकार में ये नहीं दिखता. राष्ट्रहित में हमारी कूटनीति और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर एकतरफा फैसले लेने पर रोक लगनी चाहिए.”
शर्मा के अनुसार, इस विषय पर सरकार को विचार कर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, वह वास्तविकता को स्वीकार करे और जो देश के बड़े दल हैं, उनके नेताओं के साथ बैठकर भी विचार-विमर्श करें. उन्होंने कहा, ”हम यह समझते हैं कि आने वाले संसद सत्र में विदेश नीति और देश की समस्याओं, चुनौतियां पर व्यापक चर्चा हो.” उन्होंने गाजा में ”नरसंहार” मानवीय संकट और इजराइली सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि भारत इजराइल से क्यों नहीं कह सकता कि यह सब बंद किया जाए? उन्होंने कहा, ”यह दुखद और अस्वीकार्य है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में गाजा संबंधी मध्यस्थता प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. इससे ‘ग्लोबल साउथ’ के अगुवा और आवाज के तौर पर भारत की विश्वसनीयता को झटका लगा है.” शर्मा ने कहा कि मानवाधिकार और मानवता को लेकर भारत के ऐतिहासिक सैद्धांतिक रुख से अब भारत का पीछे हटना दुखद है. उन्होंने कहा कि भारत के वर्तमान रुख से ”मित्र राष्ट्रों” को दुख पहुंचा है.
