राष्ट्रवाणी: रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था अब पारंपरिक प्रणाली से आगे बढ़कर आधुनिक और डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई स्मार्ट मीटर परियोजना और ‘मोर बिजली ऐप’ ने बिजली उपभोग और प्रबंधन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है। यह पहल न केवल बिजली बिलिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सटीक बना रही है, बल्कि उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग पर बेहतर नियंत्रण का अवसर भी दे रही है। राज्य सरकार की यह पहल तकनीक के माध्यम से आम नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता अब अपनी बिजली खपत की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त कर सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार अपने उपयोग को नियंत्रित कर सकते हैं। पहले उपभोक्ताओं को महीने के अंत में बिजली बिल मिलने के बाद ही अपनी खपत का अंदाजा हो पाता था। कई बार बिल अधिक आने पर कारण समझना भी मुश्किल होता था। स्मार्ट मीटर ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। अब उपभोक्ता हर 30 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे वे यह समझ सकते हैं कि किस समय और किस उपकरण के कारण बिजली की खपत अधिक हो रही है। यह सुविधा उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने के साथ-साथ ऊर्जा बचत के लिए भी प्रेरित कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच रही है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब उसका सीधा फायदा आम नागरिक तक पहुंचे। स्मार्ट मीटर इसी उद्देश्य को पूरा करने वाली पहल के रूप में सामने आया है, जिसने बिजली बिलिंग व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया है। स्मार्ट मीटर के साथ ‘मोर बिजली ऐप’ उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल सुविधा का एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आया है। इस ऐप के जरिए उपभोक्ता अपनी दैनिक बिजली खपत पर नजर रख सकते हैं और आने वाले बिल का अनुमान पहले से लगा सकते हैं। ऐप की खासियत यह है कि उपभोक्ता अपनी वर्तमान बिजली खपत की तुलना पिछले महीने और पिछले साल की खपत से भी कर सकते हैं। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि उनकी बिजली खपत कहां बढ़ रही है और किन उपायों से इसमें कमी लाई जा सकती है। ऊर्जा संरक्षण की दिशा में यह डिजिटल पहल उपभोक्ताओं को जिम्मेदार बिजली उपयोग के लिए प्रेरित कर रही है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर के माध्यम से ऊर्जा बचत को जनभागीदारी का रूप मिल रहा है। उपभोक्ता अब यह आसानी से पता कर सकते हैं कि घर या संस्थान में कौन-से उपकरण कितनी बिजली खर्च कर रहे हैं। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग को कम करने में मदद मिल रही है। रायगढ़ के रिकेश कुमार सोनी और राजनांदगांव के संजय तेजवानी जैसे उपभोक्ताओं का अनुभव भी इस बदलाव को दर्शाता है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली ऐप’ के आने के बाद बिजली खपत और बिल से जुड़ी जानकारी पहले से अधिक स्पष्ट हो गई है। अब मीटर रीडिंग का इंतजार नहीं करना पड़ता और बिजली उपयोग को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। शुरुआत में कुछ उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा थी कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल बढ़ जाएगा। हालांकि बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिल में वृद्धि का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि अधिक बिजली खपत या उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना होता है। उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए बिजली विभाग ने पुराने मीटर और स्मार्ट मीटर का तुलनात्मक परीक्षण भी किया। इस परीक्षण में दोनों मीटरों की रीडिंग समान पाई गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से सटीक और विश्वसनीय है। छत्तीसगढ़ सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत 400 यूनिट तक सीमित रखनी होती है। स्मार्ट मीटर इस लक्ष्य को हासिल करने में उपभोक्ताओं की मदद कर रहा है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ता लगातार अपनी खपत पर नजर रख सकते हैं और जरूरत के अनुसार बिजली उपयोग में बदलाव कर सकते हैं। इससे उन्हें योजना का लाभ लेने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक बचत भी हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ डिजिटल भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली ऐप’ जैसी पहल राज्य में तकनीकी विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत कर रही हैं। यह पहल प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसे राष्ट्रीय अभियानों के साथ भी तालमेल स्थापित कर रही है और राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में सहयोग दे रही है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना केवल बिजली व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली में आए तकनीकी परिवर्तन का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह प्रयास दिखाता है कि जब नीतियां जनहित और दूरदर्शी सोच के साथ लागू की जाती हैं, तो उनका प्रभाव व्यापक होता है। आज प्रदेश के लाखों उपभोक्ता डिजिटल माध्यमों से अपने बिजली उपयोग को समझ रहे हैं, ऊर्जा की बचत कर रहे हैं और अधिक जागरूक बन रहे हैं। स्मार्ट मीटर और डिजिटल सेवाएं छत्तीसगढ़ को एक ऐसे मॉडल राज्य की ओर ले जा रही हैं, जहां तकनीक, पारदर्शिता और जनकल्याण एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।

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