राष्ट्रवाणी: अदाणी ग्रुप का धामरा पोर्ट भारत का पहला बड़ा निजी मल्टी-कार्गो पोर्ट बन गया है जो पूरी तरह से नवीकरणीय …और पढ़ें धामरा पोर्ट भारत का पहला पूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा पोर्ट मासिक 90 लाख यूनिट बिजली अक्षय स्रोतों से पूरी APSEZ की ‘नेट-जीरो’ रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।
अदाणी ग्रुप ने एक नया कारनामा किया है। ओडिशा में ग्रुप की अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) द्वारा संचालित धामरा पोर्ट ने अपनी पूरी बिजली की खपत को रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) में शिफ्ट कर लिया है। इस तरह यह पूरी तरह से रिन्यूएबल बिजली पर चलने वाला भारत का पहला लार्ज-स्केल वाला प्राइवेट मल्टी-कार्गो पोर्ट बन गया है।
यह पोर्ट हर साल 48 मिलियन टन (MT) से अधिक कार्गो को मैनेज करता है और अब अपनी 90 लाख यूनिट से ज्यादा मासिक बिजली की जरूरत को रिन्यूएबल सोर्सेज से पूरा करता है। APSEZ ने बताया कि मौजूदा ऑपरेशन लेवल पर, इसकी सालाना रिन्यूएबल बिजली की खपत 108 गीगावाट-घंटे (GWh) से अधिक है। अगस्त 2026 से लागू होने वाला यह बदलाव APSEZ की लॉन्ग टर्म की ‘नेट-जीरो’ रणनीति का हिस्सा है।
इससे खरीदी गई बिजली से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने और ज्यादा ऊर्जा की खपत वाले पोर्ट ऑपरेशन्स के पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार होने की उम्मीद है।यह बदलाव कैप्टिव रिन्यूएबल पावर, थर्ड-पार्टी एक्सेस व्यवस्था और ओडिशा के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत ग्रीन-पावर की खरीद के कॉम्बिनेशन से हासिल किया गया है।
धामरा की लगभग 25-30 प्रतिशत रिन्यूएबल बिजली गुजरात के खावड़ा में APSEZ के कैप्टिव हाइब्रिड पावर प्लांट से आती है। साथ ही 10-15 प्रतिशत बिजली थर्ड-पार्टी एक्सेस के जरिए मिलती है। बाकी जरूरत ओडिशा की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी के साथ ‘ग्रीन कंज्यूमर’ व्यवस्था के जरिए पूरी की जाती है।
अब पोर्ट पर 24-घंटे चलने वाले ऑपरेशन्स, जैसे कार्गो हैंडलिंग, स्टोरेज, रेल-लिंक्ड एक्टिविटीज और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल बिजली से चलते हैं। ओडिशा तट पर हल्दिया और पारादीप के बीच स्थित धामरा, पूर्वी भारत के प्रमुख डीप-ड्राफ्ट पोर्ट्स में से एक है। इसकी इंस्टॉल्ड क्षमता 60 MT है और इसने मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में 48.8 MT कार्गो संभाला।इस पोर्ट में छह ड्राई-कार्गो बर्थ, रैपिड-लोडिंग साइलो, वैगन टिपलर, ट्रैक हॉपर, मशीनीकृत स्टोरेज यार्ड और जेटी इक्विपमेंट हैं।
वहीं ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मिनरल-रिच इलाकों (हिंटरलैंड) तक रेल और सड़क कनेक्टिविटी भी है।
