राष्ट्रवाणी: त्योहारी सीजन से पहले एसी, टीवी और वॉशिंग मशीन जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद महंगे होंगे। कच्चे माल की बढ़ती लागत …और पढ़ें महंगे होंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान (एआई फोटो) तांबा, इस्पात जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण कंपनियां 5-8% दाम बढ़ाएंगी, यह इस साल की तीसरी बढ़ोतरी बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।
त्योहारी सीजन से पहले देश में एयर कंडीशनर (एसी), एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सामान महंगे हो सकते हैं। प्रमुख उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां तांबा, इस्पात जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेजी के मद्देनजर अपने उत्पादों के दाम पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।कंपनियों के मुताबिक, तांबा, एल्युमिनियम, इस्पात, प्लास्टिक और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की बढ़ती लागत के साथ-साथ माल ढुलाई खर्च और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है।
इस साल यह तीसरी मौका होगा जबकि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां दाम बढ़ाएंगी। एयर कंडीशनर की कीमतों में जहां करीब पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं कुछ कंपनियां वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और एलईडी टीवी के दाम तीन से चार प्रतिशत बढ़ाने जा रही हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी स्थिति का आकलन कर रही हैं।कई कंपनियों का मानना है कि कीमत बढ़ाने से मांग पर असर पड़ सकता है।
वहीं कुछ अन्य की राय है कि कीमत वृद्धि का असर सीमित रहेगा, क्योंकि डीलर और वितरकों के पास पहले ही पुराने दाम का स्टॉक है। ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डइकिन और सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स समेत कई कंपनियां विभिन्न श्रेणियों में कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं। एलजी और बॉश होम कम्फर्ट, जो हिताची ब्रांड के एयर कंडीशनर का कारोबार करती है, ने भी एसी की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
पैनासोनिक अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति का आकलन कर रही है।ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन ने कहा कि बढ़ती जिंस कीमतों के कारण एसी और डीप फ्रीजर की कीमतें पहले ही पांच से आठ प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि तांबा, इस्पात और प्लास्टिक समेत विभिन्न कच्चे माल के दाम चढ़ गए हैं और कंपनी इस साल अब तक तीन बार कीमतें बढ़ा चुकी है।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के कारोबार प्रमुख और कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा कि पिछली कीमत समीक्षा के बाद जिंस की लागत में आठ से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में विभिन्न श्रेणियों में पांच से सात प्रतिशत तक की कीमत वृद्धि अपरिहार्य हो गई है।हालांकि, उन्होंने कहा कि पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक अब करीब एक से डेढ़ महीने तक बाजार में उपलब्ध रह सकता है।
हायर इंडिया के अध्यक्ष एन.एस. सतीश ने कहा कि कंपनी एक अक्टूबर से एयर कंडीशनर की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि करेगी। अन्य उत्पादों, जैसे एलईडी टीवी और वॉशिंग मशीन, की कीमतों में भी दो से तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती रही, तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।सतीश के मुताबिक, तांबे की कीमत पिछले साल के करीब 8,000-9,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 14,500 डॉलर तक पहुंच गई है।
एक एयर कंडीशनर में औसतन तीन से चार किलोग्राम तांबे का इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर एसी की विनिर्माण लागत पर सीधे पड़ रहा है। डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कंवलजीत जावा ने बताया कि कंपनी ने 16 सितंबर से ही कीमतों में आठ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है।
उन्होंने कहा कि तांबे की कीमतों में करीब 25 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और डॉलर मजबूत होने से कंपनियों पर लागत का दबाव और बढ़ गया है।वहीं, सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (एसपीपीएल) ने अक्टूबर के बाद टीवी की कीमतों में करीब सात प्रतिशत की वृद्धि की योजना बनाई है। कंपनी के मुताबिक, अन्य घरेलू उपकरणों की कीमतें पहले ही चार से पांच प्रतिशत बढ़ाई जा चुकी हैं।
उद्योग के लिए चिंता की बात यह भी है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर त्योहारी मांग पर पड़ सकता है। आमतौर पर नवरात्रि से दिवाली तक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की बिक्री में तेजी आती है और कंपनियां आकर्षक छूट एवं ऑफर देती हैं। ऐसे में बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं।हालांकि, कंपनियों का कहना है कि डीलर और वितरकों के पास अगस्त-सितंबर में पुराने दाम पर खरीदा गया पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
इसलिए दिवाली तक कुछ उत्पाद पुराने दाम पर उपलब्ध रह सकते हैं। इसके बाद नए दाम बाजार में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है।उद्योग की रिपोर्ट के अनुसार, ओणम से लेकर दशहरा और दिवाली तक का त्योहारी दौर घरेलू उपकरण विनिर्माताओं की सालाना बिक्री में करीब 30 से 40 प्रतिशत का योगदान देता है।
ऐसे में कंपनियों के लिए बढ़ती लागत और त्योहारी मांग के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।
