राष्ट्रवाणी (कोरबा ब्यूरो): प्रतिनिधि, कोरबा: चक्रवात अर्णब के प्रभाव से जिले में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। दो दिनों से जारी बारिश और तेज हवाओं ने खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर पड़ा है। खेतों में पकने की कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल तेज हवा के कारण धराशायी हो रही है।
जिले में धान की खेती के लगभग 30 प्रतिशत रकबे में फसल गिरने की आशंका जताई जा रही है। वहीं खेतों में पानी भरने से फसल को और नुकसान पहुंचने की चिंता किसानों को सता रही है। लगातार वर्षा के कारण कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है।
दूसरी ओर, बारिश से बांधों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। दर्री बांध के 12 नंबर गेट को दो फीट तक खोलकर पानी छोड़ा गया है, जबकि मिनीमाता बांगो बांध में भी जलस्तर बढ़ा है। गुरुवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे।
रुक-रुककर बारिश के साथ तेज हवा चलती रही। बुधवार की तुलना में गुरुवार को मौसम का असर अधिक व्यापक दिखाई दिया। खेतों में खड़ी धान की फसल हवा के दबाव से जमीन पर गिर गई है।
फसल पकने की अवस्था में होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने से गिरी हुई फसल के खराब होने की आशंका भी है। धराशायी फसल से उपज में कमी आने की आशंका ने किसानो के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।
लगातार बारिश के चलते किसानों ने फिलहाल कटाई का काम रोक दिया है। जिले में इस वर्ष लगभग 91 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुसार, करीब 43 प्रतिशत फसल पकने की कगार पर पहुंच चुकी है।
इसमें मोटा धान की प्रजातियों का रकबा भी शामिल है। ऐसे समय में तेज हवा और बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फसल के गिरने से कटाई में परेशानी आने के साथ उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
खेतों में पानी अधिक समय तक जमा रहने पर फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। चक्रवात के प्रभाव से धान के अलावा सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है। लगातार बारिश से खेतों में अतिरिक्त पानी भरने और तेज हवा से पौधों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है।
किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार है, ताकि खेतों से पानी निकलने के बाद फसल की स्थिति का आकलन किया जा सके। वज्रपात की आशंका को देखते हुए किसानों को मवेशियों को पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय पक्के और सुरक्षित आश्रय में रखने कहा गया है। मौसम की स्थिति सामान्य होने तक किसानों को सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को भी बारिश का आंशिक असर बने रहने की संभावना है। बारिश के कारण नदी-नालों में पानी बढ़ने की स्थिति को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है। निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर पर निगरानी रखने की जरूरत है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में जलभराव रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। खेतों के मुहाने खुले रखने और जल निकासी के रास्तों को साफ करने कहा गया है, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी खेतों में जमा न हो। कटाई के बाद रखी गई उपज को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखने की भी सलाह दी गई है।
29 अक्टूबर को जिले में कुल 242.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। एक जून से 29 अक्टूबर तक जिले में औसत वर्षा का आंकड़ा 1206.3 मिलीमीटर पहुंच गया है। गुरुवार को भैसमा और कटघोरा तहसील में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि दीपका और कोरबा क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष की तुलना में इस बार अब तक लगभग 12 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। दो दिनों से जारी बारिश और तेज हवा के कारण आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने गुरुवार को शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया था।
नगर निगम, राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखते हुए निचले इलाकों की निगरानी की जा रही है। आंधी के कारण पेड़ गिरने अथवा बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष लाइनमैन दल भी तैनात किए गए हैं।
चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश के बाद जिले में स्थिति सामान्य है। किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराया जाएगा। नुकसान की स्थिति सामने आने पर फसल बीमा योजना के नियमों और प्राविधानों के अनुसार भरपाई कराने में किसानों को सहयोग दिया जाएगा।
कुणाल दुदावत, कलेक्टर, कोरबा\B \B

