राष्ट्रवाणी: अम्मा पुछदी हिमाचल प्रदेश का एक लोकगीत है, जिसमें मां और बेटी के बीच की बातचीत को बहुत खूबसूरत ढंग से दिखाया गया है। अम्मा पुछदी हिमाचल का बहुत खूबसूरत लोकगीत है (एआई Generated Image) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।

हाल ही में कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक गाने के बारे में बताया, जो उन्हें बचपन से ही काफी पसंद है। ये कोई फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक हिमाचली लोकगीत है, जिसका नाम है अम्मा पुछदी। ये लोकगीत असल में एक मां और बेटी के बीच की बातचीत की शैली में है, जिसमें मां अपनी बेटी से उसका हाल पूछती है और बेटी छिपे हुए अंदाज में अपने दिल का हाल बयां करती है।

ये लोकगीत बहुत ही खूबसूरत है और इसकी धुन इतनी प्यारी है कि इसे एक बार सुनकर आपका दिल ही नहीं भरेगा। आइए जानें क्या कहा गया है इस लोकगीत में। इस गीत में मां अपनी बेटी से पूछती है अम्मा पुछदी सुण धीये मेरिये, दुबली इतणी क्यों कर होई हो…।

यानी बेटी तू इतनी दुबली क्यों हो रही है? मां को बेटी की चिंता है इसलिए वो उसके भूख न लगने का कारण जानना चाहती है कि वो क्यों पतली होती जा रही है। इसके जवाब में बेटी कहती है पारली बणियां, मोर जो बोले हो, आमा जी इन मोर, निन्दर गवाईं हो…।

ये लोकगीत काफी पुराना है और उस जमाने में बेटी सिर्फ मां से ही अपने दिल की बात कर सकती है, लेकिन फिर भी अपने प्रेमी के बारे में बात करना बहुत मुश्किल था। इसलिए बेटी अपने दिल का हाल बयां करने के लिए मोर का बहाना लेकर अपनी बात कहती है। बेटी कहती है कि जंगल में बोलने वाले मोर ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी है।

इसलिए मुझे भूख भी नहीं लगती। यहां बेटी मोर का इस्तेमाल अपने प्रेमी और उसकी यादों के लिए करती है, जिसके बारे में वो अपनी मां को खुलकर बता नहीं पा रही है। बेटी मोर किसे कह रही है, इस बारे में मां को अंदाजा नहीं है।

इसलिए वो बेटी से कहती है सध ले बन्दुकी जो, सध ले शिकारी जो, धीये भला एतां मोर मार गिराणां हो…। मां कहती है कि वो शिकारी को बुलाएगी और जंगल में रहने वाले मोर को गोली से मार गिरवाएगी। इससे मोर का शोर उसकी बेटी को परेशान नहीं करेगा।

बेटी, जिसके लिए वो मोर उसका प्रेमी है, मां की बात सुनकर घबरा जाती है और तुरंत कहती है मोरनी नी मारणा, मोर नी गवाणा हो, हो अम्मा जी एतां मोर पिंजरा पुवाना हो…। बेटी कहती है कि नहीं, नहीं मोर को मारना नहीं है। मैं मोर को खोना नहीं चाहती।

वो मोर को एक पिंजरे में संभालकर अपने साथ रखना चाहती है। बेटी का ये जवाब, उसके दिल में छिपे प्रेम को बयां कर रहा है। इसके आगे गाने में अब बेटी मां से सवाल पूछती है कुठी जांदा चंद्र मां, कुठी जांदे तारे हो, ओ अम्मा जी कुठी जांदे दिलां दे पारे हो…।

वो जानना चाहती है कि चांद और तारे कहां चले जाते हैं और जो लोग दिल में रहते हैं, वो कहां जाते हैं? अब मां अपनी बेटी की भावना को समझ चुकी है। इसलिए मुस्कुराकर कहती है छुपी जांदा चन्द्रमा छुपी जांदे तारे हो, हो धीये भला नाइयों छुपदे दिलां दे प्यारे हो…।

सुबह होते ही चांद और तारे छिप जाते हैं, लेकिन जिनसे हम प्यार करते हैं, उनका प्रेम कभी खत्म नहीं होता। वो हमेशा दिल में ही रहते हैं। ये गीत मां और बेटी के बीच के संबंध की खूबसूरती को दिखाता है।

बेटी के लिए एक मां की फिक्र और बेटी कैसे अपने दिल की बात मां को कहती है, इसे बहुत ही खास अंदाजा में दिखाया गया है। इस गीत के अंत में दिखाया गया है कि कैसे मां अपनी बेटी को समझ जाती है और उसके दिल को दिलासा देती है।

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