बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में गणेश विसर्जन के दौरान डीजे पर नाचते समय नाबालिग की मौत मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा।
कोर्ट में राज्य शासन ने माना कि मौजूदा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में इतने कड़े प्रावधान नहीं हैं, जिससे सख्त कार्रवाई हो सके। अभी के नियमों में सिर्फ 500 से 1000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है, न तो उपकरण जब्त होते हैं और न ही कड़े प्रतिबंध लागू हैं। यही कारण है कि सरकार इस कानून में संशोधन की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

विधि विभाग की रिपोर्ट में साफ किया गया कि 1985 का राज्य अधिनियम और 2000 के केंद्रीय नियमों में टकराव की स्थिति में केंद्रीय कानून लागू होगा, क्योंकि 2000 के नियम अधिक कठोर हैं – इनमें लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए अनुमति लेना अनिवार्य और ध्वनि सीमा तय की गई है।
पूर्व में हुई सुनवाई में महाधिवक्ता ने बताया था कि ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 की तुलना में 1985 का अधिनियम कमजोर है, इसलिए उसमें संशोधन जरूरी है। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह इस मामले पर अपनी कार्रवाई और प्रस्तावित बदलाव का जवाब पेश करे।इस घटना ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के राजपुर में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान 15 वर्षीय किशोर प्रवीण गुप्ता डीजे की तेज आवाज पर डांस कर रहा था, तभी अचानक अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोग उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर लेकर पहुंचे। लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। करीब 20 मिनट बाद पहुंचे डॉक्टर ने प्रवीण को मृत घोषित कर दिया।
