नयी दिल्ली. देशभर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक सुर में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी. आर. गवई पर अदालत की कार्यवाही के दौरान हुए हमले की कोशिश की कड़ी निंदा की और इसे लोकतंत्र व संविधान पर “आक्रमण” बताया. सोमवार को हुई इस घटना पर मंगलवार को भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने अदालत में सुनवाई के दौरान सीजेआई पर कथित तौर पर जूता फेंकने की कोशिश की, लेकिन सतर्क सुरक्षार्किमयों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी वकील के पास से एक पर्ची मिली जिसमें लिखा था, “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान.” बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने वकील का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को न्यायमूर्ति गवई से बात की और कहा कि उन पर हुए हमले से हर भारतीय आक्रोशित है. मोदी ने कहा, “ऐसे घृणित कृत्यों के लिए हमारे समाज में कोई जगह नहीं है. यह पूरी तरह से निंदनीय है.” उन्होंने सीजेआई के धैर्य की सराहना की. मंगलवार को सीजेआई के गृह राज्य महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन हुए और घटना की कड़ी निंदा की गई. उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सीजेआई को “महाराष्ट्र का गौरव” बताया और कहा कि उन पर हमले का प्रयास निंदनीय है.

एक बयान में पवार ने कहा, “न्यायपालिका या न्यायाधीशों पर हमला लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर आघात है. हमारे लोकतंत्र में ऐसे कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है.” विपक्षी दल राकांपा (एसपी) ने मंगलवार को मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया. बारामती में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया. छत्रपति संभाजीनगर में राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार और कार्यकर्ताओं ने बाबासाहेब आंबेडकर और संविधान के समर्थन में तख्तियां लेकर नारे लगाए. उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई पर “हमले की कोशिश” संविधान व लोकतंत्र पर हमला है.

उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने वकील की हरकत को “घृणित” बताया और कहा कि विरोध दर्ज कराने के कई अन्य तरीके हो सकते थे. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमले की निंदा की और इसे “लोकतंत्र की आत्मा पर हमला” बताया. उन्होंने कहा कि यह हमला “राष्ट्र के संविधान पर हाथ उठाने जैसा” है.

पड़ोसी राज्य बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र में सत्ताधारी भाजपा पर इस घटना पर “चुप्पी साधे रहने” का आरोप लगाया. बिहार में अगले महीने विधानसभा चुनाव हैं. यादव ने आरोप लगाया कि “यह घटना घृणा और हिंसा को सामान्य बनाने का परिणाम है, जिसे 2014 से राज्य की शह मिलती रही है.” बिहार कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य में पार्टी का दलित चेहरा राजेश कुमार राम संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस घटना पर बोलते हुए रो पड़े. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना आरएसएस की विचारधारा को दर्शाती है.

राम ने कहा, “एक दलित व्यक्ति जीवनभर संघर्ष करके सबसे सम्मानित संवैधानिक पद पर पहुंचता है, फिर भी समाज में उसे स्वीकार्यता नहीं मिल पाती.” पूर्वोत्तर में, मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने हमले की निंदा की और दोषियों के खिलाफ गहन जांच और तुरंत कार्रवाई की मांग की. दक्षिण भारत में, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने सीजेआई गवई पर हुए हमले की कड़ी निंदा की.

नायडू ने इस घटना को अस्वीकार्य बताया और कहा कि ऐसे कृत्यों का किसी सभ्य व लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है.
वाईएसआरसीपी प्रमुख रेड्डी ने घटना को अत्यंत परेशान करने वाला और देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था की गरिमा पर हमला बताया. तमिलनाडु में, अन्नाद्रमुक के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री ई. के. पलानीस्वामी ने हमले की निंदा की और कहा कि इस प्रकार की हिंसा अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए. उत्तर भारत में, आम आदमी पार्टी (आप) ने पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार में विरोध प्रदर्शन किया.

पार्टी कार्यकर्ताओं ने आंबेडकर की तस्वीर लेकर “जय भीम” के नारे लगाए. विरोध का नेतृत्व ‘आप’ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक कुलदीप कुमार ने किया. प्रदर्शनकारियों ने “हल्ला बोल” और “चीफ जस्टिस का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए. जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सीजेआई गवई पर फेंका गया जूता “भाजपा के विकसित भारत की भयावह तस्वीर” पेश करता है क्योंकि हमलावर को भरोसा था कि उसके कृत्य का कोई गंभीर परिणाम नहीं होगा.

महबूबा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “सीजेआई बी. आर. गवई पर जूता फेंका जाना बताता है कि 2047 तक भाजपा के ‘विकसित भारत’ की तस्वीर कैसी होगी. हमलावर ने यह जानते हुए बेहिचक यह कृत्य किया कि उसे किसी असली सजा का सामना नहीं करना पड़ेगा.” मंगलवार को, सीजेआई गवई ने चिंता जताते हुए कहा कि अदालत में न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है. सीजेआई ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही.

मंगलवार को हल्के-फुल्के अंदाज. में बात करते हुए सीजेआई गवई ने एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सहयोगी न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन को एक मामले की सुनवाई के दौरान कुछ टिप्पणियां सार्वजनिक रूप से करने से रोका था, ताकि उन्हें सोशल मीडिया पर गलत तरीके से न पेश किया जाए. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी वकील पिछले महीने खजुराहो में विष्णु की एक मूर्ति की पुनस्र्थापना से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई सीजेआई की टिप्पणी से नाराज था.

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मध्य प्रदेश में स्थित यूनेस्को की विश्व धरोहर खजुराहो मंदिर परिसर के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची मूर्ति को फिर से बनाने व स्थापित करने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी. सीजेआई ने उस याचिका को “पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन लोकप्रियता” बताया था और कहा था, “यह पूरी तरह से प्रचार के लिए दायर याचिका है… जाकर भगवान से कहो कि वह खुद कुछ करें. अगर आप कह रहे हैं कि आप भगवान विष्णु के बड़े भक्त हैं, तो प्रार्थना करें और ध्यान लगाएं.” बाद में, अपनी टिप्पणी को लेकर ऑनलाइन माध्यमों पर हुई आलोचना के बाद सीजेआई ने कहा था कि वह “सभी धर्मों का सम्मान करते हैं.” भाषा जोहेब माधव

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