नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक व्यक्ति के उस दावे पर स्वत? संज्ञान लेकर निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया जिसमें उसने कहा कि एक न्यायाधीश के खिलाफ जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष को भेजी गई उसकी शिकायत पर विचार नहीं किया गया है।

न्यायाधीश का नाम लिए बिना वादी ने कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता कि एक व्यक्ति के कारण सैकड़ों न्यायाधीशों की छवि खराब हो।’’ इस पर, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘कोई भी ऐसा नहीं चाहता।’’

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नकदी की अधजली बोरी मिलने को लेकर जारी विवाद की पृष्ठभूमि में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष यह उल्लेख किया गया।

व्यक्ति ने कहा कि वह संबंधित न्यायाधीश के खिलाफ जांच का आदेश देने के लिए सीबीडीटी के अध्यक्ष को दी गई अपनी शिकायत पर विचार न किए जाने से व्यथित हैं। जब पीठ ने उससे पूछा कि वह यहां क्या चाहता है और क्या उसने उच्च न्यायालय में कोई याचिका दायर की है तो व्यक्ति ने कहा, ‘‘क्या आप कृपया इस पर स्वत: संज्ञान लेकर निर्देश पारित कर सकते हैं।’’ पीठ ने स्पष्ट किया कि वह यह सुझाव न दे, और ‘‘स्वत: संज्ञान न्यायालय के लिए है, आपके लिए नहीं’’।

तब व्यक्ति ने कहा, ‘‘तो फिर मैं केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) शिकायत और पुलिस शिकायत के साथ एक जनहित याचिका दायर करूंगा।’’ इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आप जो चाहें करें, हम आपको सलाह देने के लिए यहां नहीं बैठे हैं।’’

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