राष्ट्रवाणी: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों …और पढ़ें वित्त मंत्रालय ने कच्चे तेल की कीमतों को जोखिम बताया। सितंबर में कच्चे तेल की कीमत में 28% से ज्यादा उछाल। घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत, पर वैश्विक चुनौतियां बरकरार।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था भले ही सुस्त पड़ी है, लेकिन भारत की इकॉनमी तेजी से ग्रो कर रही है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर आ रही चुनौतियां भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं।
दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का तूफान जारी है।सितंबर के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता बनी हुई है। यही कारण है कि वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा ‘मंथली इकोनॉमिक रिव्यू’ में इन दोनों कारणों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के डेटा के अनुसार, सितंबर में भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की औसत कीमत 116.04 डॉलर प्रति बैरल रही। वहीं, अगस्त में यह 90.19 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी इसमें 25.85 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ है।
प्रतिशत में यह लगभग 28.66 फीसदी है। 29 सितंबर को भारतीय बास्केट $116.52 प्रति बैरल पर भी ट्रेड कर रही थी। अगर क्रूड में यही तेजी का दौर जारी रहा तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
भारतीय क्रूड बास्केट में ‘स्वीट क्रूड’ (जो ‘डेटेड ब्रेंट’ पर आधारित है) और ‘सावर क्रूड’ (जो भारतीय रिफाइनरों द्वारा आयात किए जाने वाले ओमान और दुबई ग्रेड के औसत पर आधारित है) का मिश्रण शामिल होता है। वित्त मंत्रालय ने अपनी ‘मंथली इकोनॉमिक रिव्यू’ रिपोर्ट में ग्लोबल ट्रेड को लेकर बढ़ती अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया है।मंत्रालय ने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन का इस्तेमाल तेजी से आर्थिक हथियारों के तौर पर किया जा रहा है।
विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी नई मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं के लिए निवेश आकर्षित करने की होड़ में लगी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि भारत के इंपोर्ट बिल पर दबाव पड़ना। इससे ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे बिजनेस तक में इकॉनमी में लागत बढ़ सकती है।
वित्त मंत्रालय ने अपनी मंथली रिपोर्ट में कहा कि ग्लोबल ऑयल मार्केट में नए दबाव और मौसम से जुड़ी अस्थिरता के कारण रिटेल, होलसेल और प्रोड्यूसर लेवल पर घरेलू कीमतों का दबाव बढ़ गया है। वित्त मंत्रालय ने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बढ़ती अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया है। अमेरिका के एक बिल ने, जो राष्ट्रपति को रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, भारत के बाहरी माहौल में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
