न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी वीजा के मुद्दे पर ”बहुत गहरी और व्यावहारिक राय” है और वह अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर अन्य देशों के र्किमयों को रोजगार दिए जाने का समर्थन नहीं करते हैं.

अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर एच-1बी वीज़ा धारकों को रोजगार दिए जाने और इस पर ट्रंप के रुख के बारे में पूछे जाने पर लेविट ने कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के रुख को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. एच-1बी वीजा के मुद्दे पर लेविट ने कहा कि ट्रंप ”इस मुद्दे पर बहुत व्यावहारिक राय रखते हैं. वह देखना चाहते हैं कि क्या विदेशी कंपनियां अमेरिका में खरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और क्या वे बैटरी जैसी वस्तुएं बनाने के लिए विदेशी कर्मचारियों को अपने साथ ला रही हैं. वह यह देखना चाहते हैं कि शुरुआत में ही उन विनिर्माण सुविधाओं और कारखानों को चालू किया जा सके.” उन्होंने कहा कि ट्रंप हमेशा से ही अमेरिकी कर्मचारियों को ही इन नौकरियों में देखना चाहते हैं, और उन्होंने देश में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों से कहा है कि ”अगर उन्हें अमेरिका में कारोबार करना है तो बेहतर होगा कि वे मेरे लोगों को नौकरी पर रखें. राष्ट्रपति के रुख को लेकर काफी गलतफहमी रही है.” लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को पहले से कहीं बेहतर देखना चाहते हैं.

लेविट ने कहा, ”शुल्क के प्रभावी इस्तेमाल और दुनिया भर में अच्छे व्यापार समझौतों को कम करने के ज़रिए वह यह काम कर रहे हैं. इसीलिए उन्होंने हमारे देश में खरबों डॉलर का निवेश आर्किषत किया है. इससे यहां पर अच्छी तनख्वाह वाली अमेरिकी नौकरियां पैदा हो रही हैं.” ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका को दुनिया भर से प्रतिभाओं को लाना होगा, क्योंकि देश में “कुछ खास प्रतिभाएं” नहीं हैं.

ट्रंप के एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों द्वारा एच-1बी वीजा पर की गई तीखी प्रतिक्रिया के बीच राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि वह देश में कुशल पेशेवर प्रवासियों का ‘स्वागत’ करेंगे, जो अमेरिकी पेशेवरों को ‘चिप’ और ‘मिसाइल’ जैसे जटिल उत्पादों को विकसित करना “सिखाएंगे”. ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उन्हें अपने समर्थकों से इस पर ”थोड़ी नाराजगी” झेलनी पड़ सकती है, जो आव्रजन पर प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं.

अप्रैल में बीजिंग का दौरा करूंगा और अगले साल के अंत में चीन के राष्ट्रपति अमेरिका आएंगे: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का अप्रैल में बीजिंग आने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया और उन्होंने शी को अगले साल के अंत में अमेरिका की राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया. दक्षिण कोरिया में दोनों नेताओं की मुलाकात के लगभग एक महीने बाद ट्रंप ने शी से फोन पर बात की और बताया कि उन्होंने यूक्रेन, फेंटेनाइल और अमेरिकी सोयाबीन की खरीद जैसे मुद्दों पर चर्चा की. ट्रंप ने ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट में लिखा, “चीन के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं.” ट्रंप और शी के बीच फोन पर हुई बातचीत की सबसे पहले पुष्टि करने वाले बीजिंग ने राजकीय यात्राओं के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन यह जरूर बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, ताइवान और यूक्रेन के मुद्दों पर चर्चा की.

चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि शी ने ट्रंप से कहा कि ताइवान की चीन में वापसी ‘युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक अभिन्न अंग’ है और यह बीजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसका ट्रंप ने अपने पोस्ट में जिक्र नहीं किया. दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के कुछ अंशों का उल्लेख नहीं करना इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच अब भी कुछ मुद्दे हैं जबकि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बने व्यापार युद्ध को कम करने के लिए कई वार्ताओं के बाद साझा आधार तैयार करने पर जोर दे रहे हैं.

ट्रंप और शी के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की हालिया टिप्पणियों के बाद चीन-जापान संबंध संकट भरे दौर से गुजर रहे हैं. ताकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है तो जापान की सेना भी इसमें शामिल हो सकती है. जापान, अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है. ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिसके बारे में चीन का कहना है कि वह उसी का हिस्सा है.

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