नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि सैन्य निर्माण के क्षेत्र में उभरते अग्रदूतों के रूप में सैन्य इंजीनियरी सेवा (एमईएस) के युवा अधिकारियों की अहम जिम्मेदारी है कि वे ”न केवल निर्माण करें, बल्कि जिम्मेदारी के साथ निर्माण करें.” उन्होंने कहा कि एमईएस देश के सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

राष्ट्रपति ने यह संदेश उनके आधिकारिक आवास में उनसे मिलने आए एमईएस के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए दिया. उन्होंने कहा, ”व्यापक इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करके एमईएस यह सुनिश्चित करता है कि हमारे सैनिक विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से लैस हों, जिससे वे सभी परिस्थितियों में मिशन के लिए तैयार रह सकें.” राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों से सतत विकास को बढ़ावा देने और रक्षा बुनियादी ढांचे के ‘कार्बन फुटप्रिंट'(मानवीय गतिविधियों से वातावरण में छोड़ी जाने वाली हरित गैसों की कुल मात्रा) को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर ध्यान केंद्रित करने का आ”ान किया.

राष्ट्रपति ने कहा कि एमईएस आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों के उपयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा, ”इससे स्थानीय उद्योगों को समर्थन मिलता है और घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होता है. एमईएस को प्रौद्योगिकी नवाचार में भी अग्रणी बनना चाहिए. बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम), ड्रोन निगरानी जैसे उन्नत उपकरणों को एकीकृत करना, रखरखाव और परियोजना नियोजन के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन र्लिनंग का उपयोग सटीकता और प्रभावशीलता को बढ़ाएगा.” राष्ट्रपति ने मिलने आए भारतीय रक्षा संपदा सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों, को संबोधित करते हुए कहा कि तीव्र तकनीकी बदलाव के इस युग में डिजिटल समाधानों का एकीकरण एक आवश्यकता है.

उन्होंने परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बुनियादी ढांचे के विकास में हरित प्रथाओं को अपनाने, नवीकरणीय ऊर्जा समाधान अपनाने, अपव्यय को कम करने और छावनियों में जल संरक्षण सुनिश्चित करने को कहा. केन्द्रीय जल इंजीनियरिंग सेवा के परिवीक्षार्थियों के एक समूह ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात की. राष्ट्रपति ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, ”जल संसाधन प्रबंधन हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है. इंजीनियरिंग समाधान प्रदान करके जल अवसंरचना विकास में आपका योगदान देश को प्राकृतिक और मानव निर्मित जल संकटों के प्रति अधिक लचीला बनाएगा.”

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