राष्ट्रवाणी: Gold कीमत Ooutlook For Newx Week: सोने की कीमतों में गिरावट जारी है, भारत में ₹1,50,250 प्रति 10 ग्राम और …और पढ़ें इस हफ्ते फिर टूटेगा सोना, ₹1.25 लाख से नीचे आ जाएगी कीमत? US से आने वाले ये 4 आंकड़े तय करेंगे गोल्ड की चाल! जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश दुनिया में सोने की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है।
भारत में सोने की कीमत 1,50,250 रुपए (gold कीमत today) प्रति 10 ग्राम है, तो वहीं ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव 4,138 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेसी में करीब 1.28 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) तक आ गया। अमेरिका में रोजगार के कमजोर आंकड़े भी सोने की कीमतों को संभाल नहीं पाए। इस हफ्ते गोल्ड में 3% तक की गिरावट दर्ज हुई।
अब निवेशकों की नजर 4,000 डॉलर (gold कीमत outlook) के अहम स्तर पर है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और डॉलर की चाल से अगले हफ्ते सोने की दिशा तय हो सकती है। खास बात यह है कि, आगामी पूरे हफ्ते में अमेरिका से 4 अहम आंकड़े आने हैं।
माना जा रहा है कि सोमवार से कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। अमेरिका के श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, सितंबर में देश में सिर्फ 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की उम्मीदों से काफी कम थीं। बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2% हो गई, जबकि औसत वेतन में सिर्फ 0.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आमतौर पर कमजोर रोजगार आंकड़े ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ाते हैं, जिससे सोने को सहारा मिल सकता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस (gold कीमत prediction) के ऊपर अपनी बढ़त कायम नहीं रख सका और बिकवाली तेज हो गई।
XS.com के बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख साइमन-पीटर मसाबनी के मुताबिक, “सोने के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत हैं, तो दूसरी तरफ ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगाई का दबाव बना हुआ है। उनके मुताबिक, कमजोर रोजगार आंकड़ों से सोने को नीतिगत समर्थन तो मिला है, लेकिन तेजी दोबारा शुरू होने की तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।” अमेरिका में कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना कम हुई है।
हालांकि, बाजार दिसंबर में दर बढ़ने की आशंका को अभी भी ध्यान में रख रहा है। ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के कारण सोने में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता। फिफ्थ थर्ड कमर्शियल बैंक के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री बिल एडम्स का कहना है कि, “सितंबर के रोजगार आंकड़े इतने कमजोर नहीं हैं कि फेडरल रिजर्व अपना ध्यान महंगाई से हटा ले।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, पेट्रोल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम अगले फैसले पर ज्यादा असर डाल सकते हैं।” दूसरी ओर, ब्लू लाइन फ्यूचर्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार फिलिप स्ट्राइबल का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी काफी मजबूत है। उन्होंने अमेरिकी जीडीपी में 2.2% की बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा हालात को आर्थिक ठहराव और महंगाई के एक साथ बने रहने वाली स्थिति नहीं कहा जा सकता।
ट्रेड नेशन के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक डेविड मॉरिसन के मुताबिक, सोने में गिरावट का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और सोना तेजी नहीं पकड़ पाता, तो कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेंसी में करीब 1.23 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) के सपोर्ट स्तर को दोबारा परख सकती है।
हालांकि, इस स्तर के आसपास कीमतों में स्थिरता आने और आगे तेजी की गुंजाइश भी बन सकती है। अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ अमेरिका के कुछ अहम आंकड़ों की भूमिका रहेगी। सोमवार को आईएसएम सर्विसेज पीएमआई, बुधवार को फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक का ब्योरा, गुरुवार को साप्ताहिक बेरोजगारी दावों और शुक्रवार को मिशिगन यूनिवर्सिटी के शुरुआती उपभोक्ता भावना सर्वे पर निवेशकों की नजर रहेगी।
फिलहाल सोने के लिए 4,200 डॉलर का स्तर तेजी की राह में अहम है, जबकि 4,000 डॉलर संभावित सपोर्ट बना हुआ है। हालांकि, ये अंतरराष्ट्रीय बाजार के स्तर हैं। भारतीय बाजार में सोने की कीमत रुपए-डॉलर विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग के कारण अलग हो सकती है।
