राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिला अंतर्गत डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम कोरगुड़ा में बिना किसी शासकीय अनुमति के स्वास्थ्य शिविर लगाने की कोशिश कर रहे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। कोरगुड़ा ग्राम पंचायत भवन में ‘रेट्रो ह्यूमेनकेयर’ नामक संस्था द्वारा आयोजित इस शिविर की सूचना मिलते ही बालोद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने मौके से दवाइयां, फूड सप्लीमेंट्स, स्वास्थ्य उपकरण और एक वाहन जब्त किया। जब्त की गई पूरी सामग्री का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 7 लाख 18 हजार 597 रुपये आंका गया है। मौके पर मौजूद चार व्यक्तियों से जब पुलिस ने शिविर आयोजन की अनुमति और वैधानिक दस्तावेज मांगे, तो वे कोई भी वैध कागजात नहीं दिखा सके।

इसके बाद पुलिस ने हरंडडा निवासी राजेश कुमार कोठारी, हुडको भिलाई निवासी टी. वेंकटेश राव, कबीरधाम निवासी सुरेंद्र पटेल और उतई दुर्ग निवासी मोहित कुमार रक्सेल के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106 के तहत कार्रवाई करते हुए सामान जब्त कर लिया। कोतवाली पुलिस ने संस्था के प्रमुख के. रत्नम को सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।

पुलिस ने शिविर स्थल से मारुति ईको वाहन, क्वांटम रेजोनेंस मैग्नेटिक एनालाइजर मशीन, सैमसंग लैपटॉप, कैनन प्रिंटर, वजन मापने की मशीन और केबल बोर्ड शामिल हैं। इसके अलावा स्मृति वर्धक ग्रेन्यूल्स, महिला स्वास्थ्य गोलियां, मधुमेह, रक्तचाप, गुर्दा, लिवर, थायराइड, हृदय स्वास्थ्य पाउडर, ओमेगा कैप्सूल, दर्द निवारक तेल, रक्त शोधक सिरप, हर्बल चाय और सुवर्ण प्राशन जैसी ढेरों सामग्रियां बरामद की गई हैं।

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पंचायत ने शिविर को लेकर अनभिज्ञता जताई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उइके ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे किसी भी आयोजन की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं, कोरगुड़ा के उपसरपंच विजय कुमार यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोजकों ने पंचायत को कोई पूर्व सूचना नहीं दी और बिना अनुमति के पंचायत भवन का ताला खोलकर बिजली का उपयोग किया।

शिविर में स्थानीय विधायक की तस्वीर वाले बैनर लगाए जाने पर उपसरपंच ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ओर से भी पंचायत को कोई संदेश नहीं मिला था। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें भ्रमित कर पैसे वसूले जा रहे थे। गांव में प्रचार किया गया था कि हैदराबाद से बड़े विशेषज्ञ आ रहे हैं और दस हजार रुपये की जांच महज सौ रुपये में होगी।

ग्रामीणों के अनुसार, पंजीयन के नाम पर सौ रुपये लेने के बाद लोगों को विभिन्न उत्पादों के नाम पर तीन सौ से लेकर 24 सौ रुपये तक वसूले गए। स्थानीय निवासी हिना देवांगन ने बताया कि उनसे कमजोरी की शिकायत पर 24 सौ रुपये लेकर उत्पाद दिए गए। छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसायटी के चेयरमैन और जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू ने कहा कि यदि ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ या नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस अब पूरे मामले के कानूनी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

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