राष्ट्रवाणी: Mumbai Commercial Capital: मुंबई कभी सात छोटे द्वीपों वाली मछुआरों की बस्ती थी, जो 1661 में पुर्तगालियों से अंग्रेजों को …और पढ़ें कभी सिर्फ मछुआरों की बस्ती थी मुंबई, फिर कैसे बनी देश की आर्थिक राजधानी? अंग्रेजों को दहेज में किसने दे दिया था पूरा शहर मुंबई पहले सात छोटे द्वीपों का एक शांत समूह थी।
1661 में पुर्तगालियों ने इसे अंग्रेजों को दहेज में दिया। कपास व्यापार और BSE ने इसे वित्तीय केंद्र बनाया। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| कभी मुंबई सिर्फ सात छोटे-छोटे द्वीपों का एक शांत समूह था, जहां अरब सागर की लहरों के बीच मछुआरों की बस्तियां बसी थीं।
आज यही मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग, बॉलीवुड, कॉरपोरेट और इंटरनेशनल ट्रेड तक, भारत की अर्थव्यवस्था के कई बड़े पहिए इसी शहर से घूमते हैं। खास बात यह है कि भारत की कुल जीडीपी में मुंबई की हिस्सेदारी 6% से भी ज्यादा है।
अब सवाल है कि आखिर मछुआरों के गांव से देश के सबसे बड़े बिजनेस हब तक मुंबई कैसे (how mumbai became financial capital) पहुंची? चलिए जानते हैं मुंबई बनने की दिलचस्प कहानी। मुंबई की किस्मत बदलने की कहानी साल 1661 से शुरू होती है।
उस समय सातों द्वीप पुर्तगालियों (portuguese mumbai history) के कब्जे में थे। इसी साल पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन की शादी ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय से हुई। शादी के बाद ये सातों द्वीप अंग्रेजों को दहेज में दे दिए गए।
अंग्रेजों ने जल्द ही इस इलाके की भौगोलिक और व्यापारिक ताकत पहचान ली। समुद्र से घिरे इन द्वीपों को धीरे-धीरे जोड़कर एक बड़े भू-भाग और शहर का रूप दिया गया। तब इसे बॉम्बे कहा जाता था।
इसकी सबसे बड़ी ताकत थी- समुद्र और एक अहम प्राकृतिक बंदरगाह। 19वीं सदी में मुंबई का व्यापार तेजी से बढ़ने लगा। अंग्रेजों के लिए यह ऐसा बंदरगाह बन गया, जहां से भारत का माल आसानी से दूसरे देशों तक पहुंचाया जा सकता था।
इसी दौरान कपास और सूती कपड़े के कारोबार ने शहर की रफ्तार बदल दी। मुंबई में कई कपड़ा मिलें खुलीं और यहां का कॉटन कारोबार तेजी से फैलने लगा। कपास के कारोबार से मुंबई में पैसा आया और व्यापारियों की संख्या बढ़ी।
जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, निवेश और शेयरों के लेन-देन के लिए एक संगठित बाजार की जरूरत भी महसूस हुई। इसी जरूरत से 1875 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE (bombay stock exchange history) की शुरुआत हुई। दलाल स्ट्रीट पर बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुआ यह शेयर बाजार बाद में एशिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर पहचान बना गया।
कॉटन ट्रेड और शेयर बाजार की सफलता ने मुंबई की पहचान हमेशा के लिए बदल दी। शहर धीरे-धीरे भारत के सबसे बड़े वित्तीय केंद्र के रूप में उभर गया। आज मुंबई की अर्थव्यवस्था सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है।
यहां BSE और NSE जैसे प्रमुख शेयर बाजार हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का मुख्यालय भी मुंबई में है। देश के बड़े बैंक, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों की बड़ी मौजूदगी इसे वित्तीय सेवाओं का बड़ा केंद्र बनाती है।
मुंबई की दूसरी बड़ी पहचान बॉलीवुड और मीडिया से है। फिल्म इंडस्ट्री के साथ टेलीविजन, ओटीटी, विज्ञापन और एंटरटेनमेंट (bollywood mumbai history) से जुड़े कारोबार का बड़ा हिस्सा यहीं से चलता है। रत्न और आभूषण कारोबार में भी मुंबई की खास जगह है।
झवेरी बाजार और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाके इस कारोबार से जुड़े बड़े केंद्र हैं। डायमंड कटिंग-पॉलिशिंग और सोने के कारोबार ने भी शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। इसके अलावा टेक्सटाइल, गारमेंट, पोर्ट और शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, आईटी और कॉरपोरेट सेक्टर भी मुंबई की आर्थिक ताकत हैं।
टाटा, रिलायंस और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के मुख्यालय यहां हैं। मुंबई पोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) के जरिए देश का विदेशी व्यापार भी बड़े पैमाने पर संचालित होता है। इन सात द्वीपों (seven islands of mumbai) में माहिम, वर्ली, परेल, मझगांव, बॉम्बे, छोटा कोलाबा और कोलाबा शामिल हैं।
सात शांत द्वीपों से शुरू हुई मुंबई की कहानी आज भारत के सबसे बड़े बिजनेस हब तक पहुंच चुकी है। मछुआरों की बस्तियों से शुरू हुआ यह सफर अब शेयर बाजार, बैंकिंग, कॉरपोरेट और ग्लोबल ट्रेड तक फैल चुका है। यही वजह है कि मुंबई की कमर्शियल रफ्तार आज भी देश की आर्थिक कहानी का अहम हिस्सा बनी हुई है।

