राष्ट्रवाणी: चीनी की मात्रा कम करने के लिए आजकल कई लोग आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सहारा लेते हैं, और इन्हीं में से एक जाना-पहचाना नाम है सैकरीन. यह चीनी से कई गुना ज्यादा मीठा होता है, इसलिए इसे बहुत कम मात्रा में ही इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि यह कई फूड प्रोडक्ट्स और टेबल-टॉप स्वीटनर्स में मिलाया जाता है. सैकरीन को लेकर सालों से इसके नुकसान और कैंसर से जुड़े सवाल उठते रहे हैं, मौजूदा वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक तय सीमा के भीतर इसका सेवन सुरक्षित माना जाता है. सैकरीन को लेकर सबसे ज्यादा चिंता कैंसर को लेकर ही रही है. पुराने एनिमल स्टडीज में खासकर चूहों में ब्लैडर ट्यूमर का संबंध देखा गया था, जिसके बाद इस स्वीटनर पर काफी रिसर्च हुई. एफडीए के मुताबिक बाद में 30 से ज्यादा ह्यूमन स्टडीज में यह साबित हुआ कि चूहों में मिला यह असर इंसानों पर लागू नहीं होता, और इसके बाद सैकरीन को मानव सेवन के लिए सुरक्षित माना गया. WHO और खाद्य योजकों पर संयुक्त की एक्सपर्ट कमेटी यानी JECFA ने सैकरीन और इसके सोडियम, पोटैशियम व कैल्शियम साल्ट्स के लिए 0 से 5 मिलीग्राम प्रति किलो बॉडी वेट प्रतिदिन की स्वीकार्य सीमा तय की है. यानी 60 किलो वजन वाले व्यक्ति के लिए यह सीमा करीब 300 मिलीग्राम प्रतिदिन बैठती है. ध्यान रहे कि यह सिर्फ अधिकतम सीमा है, इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को रोज इतनी मात्रा लेनी ही चाहिए. सैकरीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से चीनी की जगह मिठास देने के लिए किया जाता है. FSSAI के नियमों में सैकरीन और इसके सोडियम, पोटैशियम व कैल्शियम साल्ट्स को स्वीटनर के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है. भारत में सोडियम सैकरीन और कैल्शियम सैकरीन को फूड-ग्रेड इंग्रीडिएंट्स के रूप में भी मान्यता मिली हुई है. यह कुछ टेबल-टॉप स्वीटनर्स, शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स, कुछ ड्रिंक्स और दूसरे प्रोसेस्ड फूड्स में मिलाया जाता है.किसी खास प्रोडक्ट में सैकरीन है या नहीं, यह सिर्फ उसके इंग्रीडिएंट्स लेबल से ही पता चलता है. इसलिए पैकेट खरीदते समय सैकरीन, सोडियम सैकरीन या INS 954 जैसे नाम जरूर देख लें. यहां थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है. FSSAI के लेबलिंग नियमों में सैकरीन वाले टेबल-टॉप स्वीटनर्स पर यह चेतावनी देना जरूरी है कि ये बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं हैं. इसलिए बच्चों को ऐसे स्वीटनर्स अपनी मर्जी से नियमित रूप से देने के बजाय डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लेना ज्यादा बेहतर रहता है. सैकरीन का मतलब यह नहीं है कि इसे जितना चाहें उतना इस्तेमाल किया जा सकता है. किसी भी आर्टिफिशियल स्वीटनर की तरह इसे भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. साथ ही पैकेट पर शुगर फ्री लिखे होने का यह मतलब भी नहीं है कि पूरा प्रोडक्ट अपने आप हेल्दी हो गया. अगर आप वाकई चीनी की मात्रा कम करना चाहते हैं, तो अपने कुल मीठे फूड्स और ड्रिंक्स की मात्रा पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator निर्जला गौड़ इस वक्त ABP Live की लाइफस्टाइल डेस्क पर इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अपनी डिग्री कर रही हैं. इससे पहले वह EBNW Stories में कंटेंट राइटर के तौर पर इंटर्नशिप कर चुकी हैं. डिजिटल जर्नलिज्म और कंटेंट क्रिएशन में उनकी खास रुचि है. आसान, आकर्षक और रिलेटेबल अंदाज में कहानियों को पेश करना और पाठकों तक जानकारी को प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी खासियत है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
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