नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने रेणुकास्वामी हत्याकांड में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा कन्नड़ अभिनेता दर्शन थुगुदीपा की जमानत अर्जी मंजूर किये जाने पर बृहस्पतिवार को आपत्ति जताई. न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिस तरह से उच्च न्यायालय ने अपने विवेकाधिकार का प्रयोग किया, उससे वह ”बिल्कुल भी सहमत नहीं” है.

पीठ ने अभिनेता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि वह उचित कारण बताएं कि शीर्ष अदालत को जमानत आदेश में हस्तक्षेप क्यों नहीं करना चाहिए. पीठ ने सिब्बल से कहा, ”ईमानदारी से कहूं तो, हम उच्च न्यायालय द्वारा विवेकाधिकार के प्रयोग के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं. पूरी ईमानदारी से, हम यही कहेंगे.” पीठ ने कहा, ”हम आपकी बात सुनेंगे, क्योंकि आपके मुवक्किल जमानत पर हैं, लेकिन निश्चित तौर पर आपने देखा होगा कि उच्च न्यायालय ने किस तरह से आदेश दिया.” सिब्बल ने पीठ से पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए गए प्रमुख गवाहों के बयानों की पड़ताल करने का अनुरोध किया.

यह पूछे जाने पर कि उच्च न्यायालय के आदेश का कौन सा भाग पीठ को परेशान कर रहा है, न्यायमूर्ति पारदीवाला ने उस भाग का उल्लेख किया, जहां उच्च न्यायालय यह रास्ता ढूंढ रहा था कि ‘उन्हें (आरोपियों को) जमानत पर कैसे रिहा किया जाए.’ पीठ ने कहा, ”आपको हमें यह विश्वास दिलाना होगा कि इस न्यायालय के हस्तक्षेप करने का कोई उचित कारण नहीं है.” पीठ ने कर्नाटक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से कहा कि वह 22 जुलाई को अगली सुनवाई पर आरोपियों के पूर्ववृत्त (यदि कोई हो) के बारे में सूचित करें.

पीठ राज्य सरकार की उस याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें दर्शन और अन्य सह-आरोपियों से संबंधित उच्च न्यायालय के 13 दिसंबर, 2024 के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी. दर्शन पर अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर 33-वर्षीय रेणुकास्वामी नामक उस प्रशंसक का अपहरण करने और उसे प्रताड़ित करने का आरोप है, जिसने कथित तौर पर पवित्रा को अश्लील संदेश भेजे थे.

पुलिस का आरोप है कि पीड़ित को जून 2024 में बेंगलुरु के एक शेड में तीन दिनों तक रखा गया और उसे क्रूर यातनाएं दी गईं तथा उसका शव एक नाले से बरामद किया गया. शीर्ष अदालत ने 24 जनवरी को राज्य सरकार की याचिका पर अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और अन्य को मामले में नोटिस जारी किए. अंतरिम आदेश में, पीठ ने मामले में उन्हें दी गई ज.मानत रद्द करने से इनकार कर दिया.

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध के बावजूद जमानत आदेश के ”कार्यान्वयन पर रोक लगाना उचित नहीं” है, क्योंकि यह जमानत निरस्त करने के समान होगा. दर्शन को अपने प्रशंसक रेणुकास्वामी की आठ जून 2024 को कथित तौर पर हत्या करने के आरोप में 11 जून, 2024 को गिरफ्तार किया गया था. अभिनेता को गिरफ्तार कर बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में रखा गया था, लेकिन जब जेल के कुछ अन्य कैदियों के साथ आराम करते हुए उनकी एक तस्वीर तेजी से प्रसारित हुई, तो उन्हें बल्लारी केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.

राज्य सरकार ने छह जनवरी को जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था. तैंतीस-वर्षीय ऑटोरिक्शा चालक रेणुकास्वामी का पार्थिव शरीर नौ जून, 2024 को मिला था. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दर्शन को 30 अक्टूबर, 2024 को चिकित्सा आधार पर छह सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दी, लेकिन उसके बाद दिसंबर में नियमित जमानत दे दी.

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