दीर अल बलाह (गाजा पट्टी). गाजा पट्टी में इजराइली हमलों और गोलीबारी में मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक कम से कम 46 फलस्तीनी मारे गए, जिनमें से ज्यादातर भोजन की तलाश में आई भीड़ में शामिल थे. स्थानीय अस्पतालों ने यह जानकारी दी.
मृतकों में 30 से अधिक वे लोग हैं जो मानवीय सहायता प्राप्त करने के दौरान मारे गये.

इजराइली सेना ने किसी भी हमले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि यह केवल चरमपंथियों को निशाना बनाता है तथा नागरिकों की मौत के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराता है, क्योंकि समूह घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं. ये मौतें उस समय हुईं जब ब्रिटेन ने यह ऐलान किया कि अगर इजराइल हमास के साथ युद्धविराम को राजी नहीं होता है, तो वह सितंबर में फलस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देगा. फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी ऐसी ही घोषणा की थी. इजराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह ब्रिटिश बयान को अस्वीकार करता है.

गाजा सिटी के शिफा अस्पताल ने बताया कि मंगलवार रात को 12 लोग मारे गए, जब इजराइली सेना ने उत्तर-पश्चिमी गाजा में जिकिम क्रॉसिंग से आने वाले सहायता ट्रकों का इंतजार कर रही भीड़ पर गोलीबारी की. अस्पताल ने बताया कि जबालिया शरणार्थी शिविर तथा उत्तरी शहरों बेत लाहिया और बेत हनून में हुए हमलों में 13 अन्य लोग मारे गए.

दक्षिणी शहर खान यूनिस में, नासेर अस्पताल ने कहा कि उन्हें 16 लोगों के शव मिले हैं. अस्पताल का कहना है कि वे मंगलवार शाम को नवनिर्मित मोराग कॉरिडोर के पास सहायता सामग्री ला रहे ट्रकों का इंतजार करते समय मारे गए थे. शहरी नुसेरात शरणार्थी शिविर के अवदा अस्पताल ने कहा कि उसे चार फलस्तीनियों के शव मिले हैं. वे बुधवार को गाजा ‘ूमैनिटेरियन फाउंडेशन द्वारा संचालित सहायता वितरण स्थल के पास इजराइली गोलीबारी में मारे गए थे. इसके अलावा, क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में गाजा पट्टी में कुपोषण से संबंधित कारणों से एक बच्चे समेत सात फलस्तीनियों की मौत हो गई. गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से कुल 89 बच्चे कुपोषण से मर चुके हैं.

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