राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, कवर्धा। कबीरधाम जिले के अंतर्गत खपरी गांव के ग्रामीणों ने प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से तंग आकर अपनी समस्या का समाधान खुद निकालने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया । जिस पक्की पुलिया के निर्माण के लिए ग्रामीण पिछले पंद्रह वर्षों से लगातार जनपद व जिला प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, वहां से केवल आश्वासन ही मिले।
बार-बार की मांग के बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आखिरकार खपरी के ग्रामीणों ने व्यवस्था पर निर्भर रहने का मोह छोड़कर खुद नाले में उतरने का साहसिक फैसला किया। रविवार की सुबह गांव के पचास से अधिक ग्रामीण अपने-अपने घरों से खाली प्लास्टिक की बोरियां और फावड़े लेकर बैजागी नाले पर एकत्रित हुए।
ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बोरियों में मिट्टी और रेत भरकर उन्हें नाले के बहाव के बीच कतारबद्ध तरीके से बिछाना शुरू किया। करीब पांच घंटे की अथक और सामूहिक मेहनत के बाद ग्रामीणों ने आवागमन के लिए एक सुगम अस्थायी रास्ता तैयार कर दिया। रास्ता पूरा होते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने जयकारे लगाकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैजागी नाला खपरी से महामाया मंदिर और कृषि भूमि तक जाने का मुख्य संपर्क मार्ग है। बारिश के मौसम में इस नाले में तीन फीट से अधिक पानी भर जाने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए इसे पार करना खतरनाक हो जाता था। किसानों को खेतों तक पहुंचने में भारी कठिनाई होती थी।
इसके अलावा नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान मंदिर में ज्योत प्रज्वलन और दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भी हर साल भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। श्रमदान करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था केवल फौरी राहत के लिए है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पचास लोग महज पांच घंटे में रास्ता बना सकते हैं, तो जिम्मेदार तंत्र पंद्रह वर्षों में एक पक्की पुलिया क्यों नहीं तैयार कर सका।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि आगामी नवरात्रि से पहले बैजागी नाले पर पक्के पुल का निर्माण सुनिश्चित किया जाए ताकि हर साल ग्रामीणों को इस तरह मजबूर न होना पड़े। …………………………………..
