राष्ट्रवाणी: भारत ने अमेरिका के नए प्रतिबंध कानून (SRIA) को लेकर अमेरिकी सांसदों के सामने चिंता जताई है, जो रूस और …और पढ़ें भारत ने अमेरिकी सांसदों के सामने चिंता जताई (एआई फोटो) भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध कानून SRIA पर चिंता जताई कानून का भारत-अमेरिका संबंधों और ऊर्जा बाजार पर असर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी सांसदों से बात की बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।
भारत ने रूस और ईरान को टारगेट करने वाले यूएसए के नए प्रतिबंध कानून को लेकर अमेरिकी सांसदों के सामने चिंता जताई है। भारत ने चेतावनी दी है कि इस कानून के प्रावधानों का असर भारत-अमेरिका संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गयी जानकारी में बताया गया है कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रविवार को नई दिल्ली में हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट के नेतृत्व में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ (SRIA) पर नई दिल्ली की चिंताएं जाहिर कीं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार मीटिंग में द्विपक्षीय प्रकृति के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही, विदेश सचिव ने SRIA कानून के बारे में भारत की चिंताएं भी जाहिर कीं कि इसका द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ेगा।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को SRIA कानून पर हस्ताक्षर किए, जब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने महीने की शुरुआत में सीनेट द्वारा संशोधित कानून को मंजूरी दी थी।
अब यह ‘पब्लिक लॉ 119-111’ बन गया है। यह कानून उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाने का सिस्टम बनाता है जो रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद से जुड़ी कुछ शर्तों को पूरा करते हैं। धारा 113 के तहत, यह उपाय उन देशों पर लागू होता है जो तय समय के बाद भी रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदना जारी रखते हैं और पिछले 12 महीनों में मात्रा के हिसाब से रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े इम्पोर्टर्स में शामिल रहे।इसमें वे देश भी शामिल हैं जिनकी पहचान रूसी तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले सबसे बड़े देशों के तौर पर की गई है।
कानून में भारत का नाम नहीं लिया गया है और न ही यह भारतीय सामान पर अपने आप 100% टैरिफ लगाता है। इसके तहत अमेरिकी अधिकारियों को यह तय करना होता है कि कौन से देश इस दायरे में आते हैं और टैरिफ दर शून्य से अधिक और 100% तक तय की जा सकती है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को ड्यूटी या अन्य प्रतिबंधों से छूट देने की भी इजाजत देता है, अगर कांग्रेस को लिखित सर्टिफिकेशन दिया जाए कि ऐसी छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
भारत ने कई स्तरों पर यह मुद्दा उठाया है। मिसरी का यह कदम पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत के बाद उठाया गया है, जिसमें दोनों पक्षों ने नए प्रतिबंध कानून के असर पर भी चर्चा की थी।

